नोएडा में जमीन हड़पने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति को बेहद कम कीमत पर बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस कथित घोटाले में शामिल एक संगठित गिरोह पर शिकंजा कसते हुए नोएडा, दिल्ली और एनसीआर के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट की बहुमूल्य जमीनों को फर्जी कागजात और नकली पदाधिकारियों के जरिए बेचकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMFI) ट्रस्ट से जुड़ी जमीनों की कथित फर्जी बिक्री से संबंधित है। आरोप है कि जाली बोर्ड रेजोल्यूशन, नकली अथॉरिटी लेटर और फर्जी मुहरों का इस्तेमाल कर संपत्तियों की बिक्री की गई और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया।
FCRF’s Flagship Cyber Law Certification Returns With a New Four-Week Cohort
सबसे चौंकाने वाला मामला दिसंबर 2025 का बताया जा रहा है, जब नोएडा के गेझा तिलपताबाद गांव में स्थित लगभग 3.3610 हेक्टेयर जमीन, जिसका सर्किल रेट करीब ₹33.61 करोड़ था, उसे मात्र ₹16 करोड़ में बेच दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस सौदे को एक फर्जी संस्था के नाम पर अंजाम दिया गया और कई परतों में लेन-देन को छिपाने की कोशिश की गई।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी ने शुरुआती जांच के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
ईडी की जांच में दो लोगों को इस कथित गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिनकी पहचान जीराम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय के रूप में हुई है। एजेंसी के अनुसार ये दोनों पहले भी एक अन्य आर्थिक अपराध मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से जमीनों की हेराफेरी का नेटवर्क सक्रिय रहा।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सिर्फ एक नहीं बल्कि कई जमीनों को अलग-अलग खरीदारों को बेचकर डबल और ट्रिपल सेलिंग जैसी रणनीति अपनाई। इससे कई निवेशक और कंपनियां भी इस विवादित लेन-देन में फंस गईं।
ईडी ने दिल्ली के नारायण विहार, नोएडा और उत्तर दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र सहित कई स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है। इस दौरान कई कंपनियों और व्यक्तियों के ठिकानों की तलाशी ली गई, जिनमें सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर प्रदीप सिंह का नाम भी सामने आया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में फर्जी ट्रस्ट बनाकर जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई और इसके बाद धन को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। अब एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि इस पैसे को किन-किन माध्यमों से आगे निवेश किया गया।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही इस मामले में एक एसआईटी जांच का आदेश दिया गया था, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में जांच की जा रही है। अब ईडी की एंट्री के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है और पूरे भू-माफिया नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी दस्तावेज, कमजोर निगरानी प्रणाली और रियल एस्टेट सेक्टर की जटिल संरचना का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर घोटाले किए जाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार आगे की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस फर्जीवाड़े में किन सरकारी तंत्रों या स्थानीय स्तर पर किन लोगों की भूमिका रही है और कितनी संपत्तियां अवैध तरीके से ट्रांसफर की गई हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं, ताकि मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके और पूरे घोटाले की वास्तविक परतें सामने लाई जा सकें।
