महाराष्ट्र सरकार ने ऐप आधारित मोबिलिटी सेवाओं पर अपनी सख्ती और बढ़ा दी है और प्रमुख राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे Ola, Uber और Rapido के “बाइक टैक्सी” फीचर को तुरंत बंद करने की मांग की है। यह कदम राज्य में ऐसे अनियमित परिवहन सेवाओं की वैधता को लेकर जारी विवाद और प्रवर्तन संबंधी चुनौतियों के बीच उठाया गया है।
महाराष्ट्र साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार, बाइक टैक्सी विकल्प को बंद करने की पूरी जिम्मेदारी ऐप एग्रीगेटर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आंशिक या चयनात्मक अनुपालन स्वीकार्य नहीं होगा और कंपनियों को उन सभी सेवाओं को हटाना होगा जो मौजूदा परिवहन नियमों के तहत अनुमोदित नहीं हैं।
साइबर सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत राज्य में ऐप आधारित बाइक टैक्सी सेवाएं अवैध मानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल तकनीकी बदलाव का नहीं है, बल्कि पूरे अवैध फीचर को एप्लिकेशन सिस्टम से हटाने का है।
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परिवहन विभाग ने इस मामले को साइबर क्राइम डिवीजन तक पहुंचाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि यदि कंपनियां आदेश का पालन नहीं करती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
हालांकि, इस बीच महाराष्ट्र सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DGIPR) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर यह दावा कि Ola, Uber और Rapido की पूरी सेवाएं बंद कर दी गई हैं, गलत है। विभाग ने बताया कि केवल बाइक टैक्सी फीचर की जांच और प्रतिबंध पर विचार किया जा रहा है, जबकि सामान्य कैब सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई विशेष रूप से बिना अनुमति चल रही दोपहिया टैक्सी सेवाओं के खिलाफ है, जिन्हें राज्य के परिवहन लाइसेंस ढांचे के तहत मंजूरी नहीं मिली है। सरकार का तर्क है कि ऐसी सेवाएं सुरक्षा मानकों, बीमा व्यवस्था और कर प्रणाली को दरकिनार करती हैं।
देश के कई राज्यों में भी बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद जारी है। नियामकों का कहना है कि इन सेवाओं में सुरक्षा, बीमा कवरेज और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल खड़े होते हैं। महाराष्ट्र में भी इसी आधार पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ऐप आधारित कंपनियों ने कम लागत और बढ़ती मांग के चलते दोपहिया सेवाओं का विस्तार किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नियमों की कमी के कारण कानूनी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
साइबर सेल ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल ड्राइवर ही नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इस सेवा के लिए जिम्मेदार हैं। कंपनियों को अपने एप स्तर पर ही यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी गैरकानूनी सेवा उपलब्ध न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल पर पुनर्विचार कर सकती हैं, खासकर उन राज्यों में जहां नियम अधिक सख्त हैं। हालांकि, इससे उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है जो सस्ते और तेज आखिरी-मील कनेक्टिविटी के लिए बाइक टैक्सी पर निर्भर हैं।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि निगरानी जारी रहेगी और आदेश का पालन न होने पर आगे कानूनी कार्रवाई, जुर्माना या ऐप संचालन पर प्रतिबंध तक लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का यह कदम डिजिटल मोबिलिटी सेवाओं पर नियंत्रण को मजबूत करने की व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है। जैसे-जैसे तकनीक आधारित परिवहन सेवाएं बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे नियामक अनुपालन और नवाचार के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
फिलहाल सरकार का फोकस यही है कि सभी ऐप आधारित प्लेटफॉर्म्स से बाइक टैक्सी फीचर तुरंत हटाया जाए, अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई तय है।
