ई-सिम वेरिफिकेशन और OTP डायवर्जन के जरिए बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ाने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा।

ई-सिम वेरिफिकेशन के नाम पर ₹77.75 लाख की साइबर ठगी: विशिंग कॉल, OTP डायवर्जन और फर्जी डिवाइस नेटवर्क का खुलासा

Team The420
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हैदराबाद। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच हैदराबाद के साइबराबाद साइबर क्राइम विंग ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ऐसे संगठित गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिन पर विशिंग कॉल, ई-सिम मैनिपुलेशन और OTP डायवर्जन तकनीक के जरिए करीब ₹77.75 लाख की ऑनलाइन ठगी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह खुद को प्रतिष्ठित बैंक और दूरसंचार विभाग से जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था और तकनीकी चालबाजी के जरिए उनके बैंक खातों तक पहुंच बना लेता था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सलीम मंडल, अब्दुल अलीम एसके उर्फ मिट्टू, सैयद हसीम रेजा उर्फ टिप्पू, मिजनूर रहमान शेख, बंसीधर और मेहबूब आलम अंसारी के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को पश्चिम बंगाल से ट्रांजिट वारंट पर हिरासत में लेकर हैदराबाद लाया गया, जहां अदालत में पेश करने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को सिटीबैंक प्रेस्टिज क्रेडिट कार्ड डिवीजन और दूरसंचार सत्यापन विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते थे। बातचीत के दौरान वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनके मोबाइल नंबर या बैंकिंग सेवाओं के सत्यापन के लिए ई-सिम को फिजिकल सिम में बदलना आवश्यक है। इसी बहाने वे पीड़ितों से संवेदनशील जानकारी हासिल कर लेते थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, गिरोह का सबसे खतरनाक हिस्सा वह तकनीकी प्रक्रिया थी जिसमें आरोपी पहले से लोड किए गए मोबाइल डिवाइस और संदिग्ध एप्लीकेशन पीड़ितों तक कुरियर के जरिए भेजते थे। पीड़ितों को निर्देश दिया जाता था कि वे अपनी सिम कार्ड को इन डिवाइस में लगाएं। जैसे ही सिम सक्रिय होती थी, बैंकिंग OTP, ट्रांजैक्शन अलर्ट और अन्य संवेदनशील संदेश सीधे आरोपियों तक पहुंचने लगते थे। इसके बाद आरोपी पीड़ितों के बैंक खातों में अनधिकृत पहुंच बनाकर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए रकम निकाल लेते थे।

पुलिस हिरासत के दौरान जांच टीम ने आरोपियों के पश्चिम बंगाल स्थित ठिकानों पर छापेमारी भी की। कार्रवाई में करीब ₹15 लाख नकद बरामद किए गए। मुख्य आरोपी सलीम मंडल के कब्जे से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पांच सिम कार्ड, सिटीबैंक लेबल, मोटोरोला स्टिकर और AUX वॉइस ट्रांसमीटर केबल जब्त किए गए। वहीं दूसरे आरोपी सैयद हसीम रेजा के पास से ₹13 लाख नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। बंसीधर के ठिकाने से ₹2 लाख नकदी और मोबाइल फोन मिला, जबकि अन्य आरोपियों से भी कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल साधारण फोन फ्रॉड नहीं बल्कि सोशल इंजीनियरिंग, टेलीकॉम मैनिपुलेशन और डिजिटल पहचान चोरी का संगठित मॉडल है। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब केवल OTP पूछने तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों के मोबाइल नेटवर्क और सिम नियंत्रण पर कब्जा कर पूरे बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के गिरोह तकनीकी जानकारी और मनोवैज्ञानिक दबाव दोनों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते हैं।

पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी अनजान कॉलर के साथ OTP, बैंकिंग डिटेल, सिम संबंधी जानकारी या KYC डेटा साझा न करें। साथ ही किसी भी अज्ञात स्रोत से आए मोबाइल डिवाइस, एप्लीकेशन या कुरियर पैकेज का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में अन्य राज्यों और संभावित बैंक खातों की भी जांच की जा रही है तथा आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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