अंबाला में ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर ₹30 लाख की ठगी, दिल्ली एयरपोर्ट पर फर्जी वीजा और टिकट का खुलासा।

₹1 लाख की शिकायत से खुला ₹152 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क: 14 राज्यों में फैले म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश

Team The420
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हैदराबाद। तेलंगाना के निजामाबाद जिले में ₹1.04 लाख की निवेश ठगी की शिकायत ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। शुरुआती तौर पर मामूली दिख रहे इस मामले की जांच करते हुए पुलिस ने ऐसे 46 म्यूल बैंक खातों का खुलासा किया, जिनके जरिए 14 राज्यों में फैले साइबर अपराधों की रकम ट्रांसफर की जा रही थी। जांच में सामने आया कि इन खातों के माध्यम से करीब ₹152.18 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन किए गए।

मामला जनवरी 2025 का है, जब निजामाबाद के एक निजी कंपनी कर्मचारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसने एक ऑनलाइन निवेश ऐप पर ₹1.04 लाख निवेश किए थे। शुरुआत में उसे छोटे निवेश पर अच्छा रिटर्न दिखाया गया, जिससे उसका भरोसा बढ़ा और उसने अलग-अलग किश्तों में अधिक रकम जमा कर दी। बाद में जब वह रकम निकाल नहीं सका, तब उसे ठगी का एहसास हुआ।

जांच के दौरान पुलिस ने जिस बैंक खाते का पता लगाया, वह एक निजी बैंक की निजामाबाद शाखा में खोला गया करंट अकाउंट था। पुलिस ने तत्काल खाते को फ्रीज कराया और उससे जुड़े व्यक्ति मोहम्मद अब्दुल जावेद को हिरासत में लिया। पूछताछ में जावेद ने बताया कि वह केवल खाते का धारक था और असली संचालन उसके कथित हैंडलर नितीश के जरिए हो रहा था।

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जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को एक और बैंक खाता मिला—56820000100031001—जो कई राज्यों में हुए साइबर अपराधों से जुड़ा पाया गया। अधिकारियों के मुताबिक यह खाता निवेश ठगी, फर्जी कॉल फ्रॉड और सोशल इंजीनियरिंग जैसे मामलों में इस्तेमाल हो रहा था। यही खाता आगे चलकर पूरे नेटवर्क की कड़ी बना।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस खाते की शिकायत पहली बार जून 2024 में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज हुई थी। उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी एक युवक से कथित निवेश फ्रॉड के जरिए लगभग ₹4 लाख ठगे गए थे और रकम इसी खाते में पहुंची थी। हालांकि उस समय जांच विभिन्न राज्यों में फैले खातों और सीमित समन्वय के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।

तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने फरवरी 2026 में “क्रैकडाउन 1.0” अभियान शुरू किया, जिसके तहत म्यूल अकाउंट नेटवर्क की व्यवस्थित जांच शुरू हुई। पुलिस ने नितीश के मोबाइल फोन से 13 बैंक खातों का डेटा बरामद किया, जिनमें लगभग ₹31 करोड़ के लेनदेन दर्ज थे। इनमें से अधिकांश खाते एक ही निजी बैंक में खोले गए थे।

इसके बाद बैंक से 2024 से 2026 के बीच खोले गए सभी करंट अकाउंट्स का विवरण मांगा गया। कुल 106 खातों की जांच में 46 खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिकॉर्ड से जुड़े पाए गए। पुलिस का दावा है कि खाते खोलने में कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत की भी आशंका है। मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

जांच में कई राज्यों के पीड़ितों की कहानियां सामने आईं। नोएडा के एक आईटी प्रोफेशनल को कथित आईपीओ निवेश के नाम पर लाखों रुपये लगाने के लिए प्रेरित किया गया। बिहार के बक्सर में एक महिला को फर्जी ट्रांजैक्शन मैसेज भेजकर पैसे वापस करने के बहाने ठगा गया। गुजरात के वडोदरा में एक व्यक्ति से रिश्तेदार की आवाज की नकल कर रकम ट्रांसफर करवाई गई। वहीं हैदराबाद के एक सरकारी कर्मचारी ने शेयर बाजार निवेश ऐप पर भरोसा कर करीब ₹13 लाख गंवा दिए।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग, निवेश ऐप और फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं। उनके अनुसार म्यूल अकाउंट नेटवर्क साइबर ठगी की रीढ़ बन चुके हैं, क्योंकि इन्हीं खातों के जरिए रकम को तेजी से अलग-अलग स्थानों पर ट्रांसफर कर जांच को जटिल बनाया जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि कई खाताधारक फिलहाल फरार हैं और उनके पते व मोबाइल नंबर फर्जी दस्तावेजों पर आधारित पाए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों और संभावित अंतरराज्यीय गिरोहों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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