हैदराबाद/तिरुपति। आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में ‘श्रीवाणी ट्रस्ट’ के तहत जारी किए जाने वाले विशेष दर्शन टिकटों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। TTD के पूर्व चेयरमैन ने टिकट बिक्री और दान प्रणाली में कथित तौर पर करीब ₹48 करोड़ के वित्तीय घोटाले का आरोप लगाते हुए मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। आरोपों के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन, दान प्रबंधन और VIP दर्शन व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार विवाद ‘श्रीवाणी ट्रस्ट’ के तहत जारी किए जाने वाले विशेष दर्शन टिकटों से जुड़ा है। इस योजना के तहत श्रद्धालुओं को एक निश्चित दान राशि जमा करने पर विशेष दर्शन की सुविधा दी जाती है। आरोप लगाया गया है कि टिकट आवंटन, दान राशि के रिकॉर्ड और लाभार्थियों की सूची में कथित अनियमितताएं हुईं, जिससे करोड़ों रुपये के राजस्व में गड़बड़ी की आशंका पैदा हुई।
पूर्व चेयरमैन ने दावा किया है कि टिकट वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई मामलों में कथित तौर पर निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ। आरोप है कि कुछ टिकट ऐसे लोगों को आवंटित किए गए जिनके रिकॉर्ड आधिकारिक सिस्टम में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थे। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग और दान से संबंधित डेटा में भी कथित विसंगतियों की बात कही गई है।
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मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोपों को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। कई सामाजिक संगठनों ने भी मंदिर प्रशासन से टिकट वितरण और ट्रस्ट फंड से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की अपील की है।
TTD प्रशासन की ओर से हालांकि अभी तक किसी बड़े वित्तीय घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि टिकट वितरण और दान प्रणाली तय नियमों के तहत संचालित होती है तथा सभी लेनदेन का रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहता है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि लगाए गए आरोपों की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक होने पर आंतरिक जांच कराई जा सकती है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार विवाद का मुख्य केंद्र ‘श्रीवाणी ट्रस्ट’ के जरिए होने वाले विशेष दर्शन आवंटन और उससे जुड़ी दान राशि का उपयोग है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि टिकट आवंटन प्रक्रिया में किसी तरह की प्राथमिकता, फर्जी लाभार्थी या सिस्टम के दुरुपयोग की संभावना थी या नहीं।
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक ट्रस्टों और मंदिर प्रशासन में डिजिटल टिकटिंग और ऑनलाइन दान व्यवस्था के बावजूद पारदर्शिता बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि ऑडिट प्रणाली मजबूत न हो तो बड़ी मात्रा में आने वाली रकम और टिकट आवंटन में अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में आमतौर पर बैंकिंग ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन टिकट लॉग, सर्वर रिकॉर्ड, दान रसीदें और लाभार्थियों की सूची की फॉरेंसिक जांच की जाती है। यदि किसी प्रकार की वित्तीय हेरफेर या डेटा मैनिपुलेशन सामने आता है तो मामला आपराधिक जांच तक पहुंच सकता है।
मामले ने श्रद्धालुओं के बीच भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि तिरुपति मंदिर देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में शामिल है और यहां प्रतिदिन लाखों रुपये की दान राशि प्राप्त होती है। धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार आरोप सीधे विशेष दर्शन टिकट प्रणाली से जुड़े होने के कारण विवाद और गहरा हो गया है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। यदि जांच शुरू होती है तो डिजिटल रिकॉर्ड, टिकट आवंटन डेटा और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की व्यापक पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल मंदिर प्रशासन पर पारदर्शिता बनाए रखने और आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
