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OTP नहीं, फिर भी खाते से उड़ गए ₹14.65 लाख: पेंशनर के अकाउंट से साइबर ठगी, तेलंगाना के तीन आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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चेन्नई। तमिलनाडु के चेन्नई से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 67 वर्षीय एक पेंशनर के बैंक खाते से बिना OTP सत्यापन के ₹14.65 लाख निकाल लिए गए। मामले की जांच के बाद अवडी साइबर क्राइम विंग ने तेलंगाना के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर अपने नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को कमीशन के बदले उपलब्ध कराते थे।

पीड़ित की पहचान पूनामल्ली निवासी नटराजन के रूप में हुई है, जिन्होंने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनके Ujjivan Small Finance Bank खाते में जमा पेंशन राशि अचानक दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर हो गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ट्रांजैक्शन के दौरान उन्हें किसी प्रकार का OTP या बैंक अलर्ट प्राप्त नहीं हुआ।

शिकायत मिलने के बाद अवडी साइबर क्राइम विंग ने मामला दर्ज कर डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड और लेनदेन की तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रकम जिन खातों में भेजी गई, वे तेलंगाना से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर संचालित किए जा रहे थे।

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इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए तेलंगाना के रहने वाले जंगम नवीन कुमार (28), कोट्टा भानु प्रसाद (33) और कट्टम राघवेंद्र (34) को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार तीनों आरोपियों ने अपने नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे और बाद में इन खातों को कथित ऑनलाइन ठगों को इस्तेमाल के लिए सौंप दिया था। बदले में उन्हें कमीशन के रूप में रकम मिलती थी।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे बैंक खाते साइबर अपराधियों के लिए “म्यूल अकाउंट” की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता है ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा क्या देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया गया।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में “बेनिफिशियरी एडिशन” यानी खाते में नए लाभार्थी जोड़कर रकम निकालने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कई मामलों में अपराधी मोबाइल नंबर क्लोनिंग, सिम स्वैपिंग, रिमोट एक्सेस या बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर खातों तक पहुंच बना लेते हैं।

महत्वपूर्ण साइबर अपराध मामलों में अक्सर देखा गया है कि ठगी के लिए सीधे अपराधी अपने खाते इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि बेरोजगार युवाओं या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन देकर उनके बैंक खाते किराये पर लेते हैं। इसके बाद इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध रकम घुमाई जाती है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अब तकनीकी हैकिंग से ज्यादा “फाइनेंशियल सोशल इंजीनियरिंग नेटवर्क” पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी उतने ही गंभीर अपराध में शामिल माने जाते हैं जितने कि मूल ठग, क्योंकि बिना ऐसे खातों के डिजिटल ठगी का पैसा निकालना आसान नहीं होता।

जांच एजेंसियों ने आम बैंक ग्राहकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से अपने बैंक खाते की गतिविधियों की जांच करें, मोबाइल नंबर अपडेट रखें और किसी भी अनधिकृत ट्रांजैक्शन की स्थिति में तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब जांच एजेंसियां इस पूरे साइबर नेटवर्क के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड और धन शोधन की संभावित कड़ियों की भी पड़ताल कर रही हैं।

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