छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक चौंकाने वाले बैंक फ्रॉड मामले में 80 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर के खाते से कथित तौर पर ₹9 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो अज्ञात महिलाओं ने गुम हुए चेक का इस्तेमाल कर बैंक से पूरी राशि नकद निकाल ली। इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा और चेक हैंडलिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने इस मामले में क्रांति चौक पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी गई है।
गुम हुआ चेक बना ठगी का हथियार
पुलिस के अनुसार, पीड़ित 80 वर्षीय डॉक्टर, जो पेशे से रिटायर्ड चिकित्सक हैं, ने कुछ दिन पहले पाया कि उनका एक चेकबुक पत्ता गायब था। यही गुम हुआ चेक बाद में इस कथित ठगी का मुख्य आधार बन गया।
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जांच में सामने आया कि दो महिलाओं ने कथित तौर पर उस चेक को हासिल किया और पहले बैंक जाकर खाते में उपलब्ध राशि की जानकारी ली। जैसे ही उन्हें पता चला कि खाते में ₹9 लाख मौजूद हैं, उन्होंने पूरी रकम निकालने की योजना बनाई।
बैंक में दबाव बनाकर पूरी राशि निकाली
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिलाएं अगले दिन फिर बैंक पहुंचीं और चेक जमा कर ₹9 लाख की पूरी राशि नकद में निकालने की मांग की। बैंक कर्मचारियों ने शुरुआत में बताया कि इतनी बड़ी नकदी उपलब्ध नहीं है और आंशिक निकासी का सुझाव दिया।
हालांकि, महिलाओं ने कथित तौर पर दावा किया कि राशि “तत्काल अस्पताल संबंधी काम” के लिए जरूरी है और एक ही बार में पूरा भुगतान देने का दबाव बनाया।
इसके बाद 8 अप्रैल को बैंक ने चेक प्रक्रिया पूरी कर ₹9 लाख नकद सौंप दिए।
कुछ दिनों बाद सामने आया फ्रॉड
कुछ दिन बाद जब पीड़िता ने अपने खाते की जांच की, तो उन्हें पता चला कि बड़ी राशि निकाल ली गई है। उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि चेक के आधार पर दो महिलाओं ने रकम निकाली है।
इसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।
CCTV फुटेज में संदिग्ध महिलाएं कैद
जांच के दौरान बैंक शाखा के CCTV फुटेज की जांच की गई। फुटेज में दो महिलाएं बैंक काउंटर से नकद राशि लेते हुए दिखाई दे रही हैं। हालांकि, दोनों ने बुर्का पहन रखा था, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है।
पुलिस ने बताया कि फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। साथ ही बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन टाइमलाइन और चेक प्रोसेसिंग डिटेल्स की भी जांच की जा रही है।
संगठित ठगी की आशंका
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल साधारण चोरी नहीं बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी हो सकता है। गुम हुए चेक का इस्तेमाल और पूरी राशि की एकमुश्त निकासी इस बात की ओर इशारा करता है कि योजना पहले से तैयार थी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों को पीड़िता के बैंक खाते या चेक संबंधी जानकारी पहले से मिली हुई थी।
बुजुर्ग खाताधारकों पर बढ़ता खतरा
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि वरिष्ठ नागरिक बैंकिंग धोखाधड़ी के लिए आसान लक्ष्य बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गुम चेक, सिग्नेचर मिसयूज और नकद निकासी से जुड़े मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
बैंकिंग विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ग्राहक किसी भी चेक के खोने की स्थिति में तुरंत बैंक को सूचित करें और खाते की नियमित निगरानी करें।
जांच जारी
पुलिस ने कहा है कि तकनीकी सर्विलांस और बैंकिंग डेटा के आधार पर आरोपियों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस घटना में और लोग शामिल हो सकते हैं। बैंक से भी पूछताछ की जा रही है कि इतनी बड़ी नकद निकासी के दौरान किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
निष्कर्ष
छत्रपति संभाजीनगर में हुआ ₹9 लाख का यह चेक फ्रॉड मामला बैंकिंग सुरक्षा में संभावित खामियों और फाइनेंशियल दस्तावेजों के दुरुपयोग को उजागर करता है। CCTV फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद जता रही है।
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि डिजिटल और पारंपरिक बैंकिंग दोनों में सतर्कता और मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
