नवसारी में नकली सोने के आभूषणों को असली बताकर Bank of Baroda शाखा से गोल्ड लोन लेने का मामला सामने आया।

₹16 करोड़ गोल्ड फ्रॉड का खुलासा: फर्जी ‘फेडरल एजेंट’ बनकर महिला से ठगी, 24 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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कोरल गैबल्स (फ्लोरिडा)। अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के कोरल गैबल्स में एक बड़ा साइबर गोल्ड फ्रॉड मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला से करीब 19 लाख डॉलर (लगभग ₹16 करोड़) मूल्य के सोने की ठगी की गई। यह पूरा मामला एक सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें फर्जी सरकारी पहचान और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया गया।

इस मामले में 24 वर्षीय सुमित बहादुर पांडे को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर ग्रैंड थेफ्ट, संगठित धोखाधड़ी की साजिश, फर्जी अधिकारी बनकर ठगी और आपराधिक गतिविधियों में संचार उपकरण के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।

फर्जी ‘फेडरल एजेंट’ बनाकर रची गई साजिश

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी और उसके साथियों ने खुद को फेडरल एजेंट बताकर पीड़िता को विश्वास में लिया। उसे यह बताया गया कि उसके बैंक खाते और वित्तीय संपत्तियां खतरे में हैं और उन्हें “फेडरल प्रोटेक्शन” में सुरक्षित रखने के लिए सोना खरीदना जरूरी है।

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इस साजिश में एक व्यक्ति “लुकास” नाम से खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लगातार अलग-अलग अनरजिस्टर्ड नंबरों से संपर्क करता रहा। बार-बार किए गए कॉल और संदेशों के जरिए पीड़िता को भ्रमित किया गया।

मानसिक दबाव और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला सोशल इंजीनियरिंग तकनीक पर आधारित था। पीड़िता को लगातार डराया गया कि अगर उसने तुरंत निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसकी संपत्ति जब्त हो सकती है या वह कानूनी मुश्किल में फंस सकती है।

लगातार बने इस डर के माहौल में महिला धीरे-धीरे बड़ी मात्रा में सोना खरीदती रही और अलग-अलग जगहों पर कथित “एजेंट्स” को सौंपती गई।

₹16 करोड़ से अधिक का सोना खरीदा गया

जांच में सामने आया कि अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच पीड़िता ने अलग-अलग ज्वेलर्स से कुल $1.9 मिलियन (करीब ₹16 करोड़) का सोना खरीदा। ठगों ने लेन-देन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा ताकि किसी को शक न हो।

सबसे बड़ा ट्रांजैक्शन लगभग $180,000 (करीब ₹1.5 करोड़) का था, जिसे सीधे आरोपी को सौंपा गया।

डिजिटल सबूतों से खुला पूरा नेटवर्क

मामले में अहम मोड़ तब आया जब आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की गई। पुलिस को व्हाट्सऐप चैट, लोकेशन डेटा, तस्वीरें और वीडियो मिले, जो पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को उजागर करते हैं।

इन सबूतों में पीड़िता की पहचान, वाहन विवरण और कोरल गैबल्स स्थित CVS स्टोर की लोकेशन से जुड़े डेटा शामिल थे। इसके अलावा सोने के बार, सिक्के और नकदी की तस्वीरें भी बरामद हुईं, जो बाद में जब्त किए गए सोने से मेल खाती थीं।

कई शहरों में फैली गतिविधियां

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ऑरलैंडो इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वाहन किराए पर लिए थे और लगातार अलग-अलग स्थानों पर मूवमेंट करता रहा।

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम से यह पुष्टि हुई कि आरोपी की गाड़ी कोरल गैबल्स में कई बार दर्ज की गई, खासकर उन तारीखों पर जब लेन-देन हुआ था।

पीड़िता का बयान

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे हर लेन-देन के लिए अलग-अलग पासवर्ड दिए जाते थे और उसे यह कहा जाता था कि वह एक “गोपनीय फेडरल प्रोटेक्शन ऑपरेशन” का हिस्सा है।

कई बार वह CVS स्टोर और आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर अज्ञात व्यक्तियों से मिली, जहां उसे सोना सौंपने के लिए मजबूर किया गया।

गिरफ्तारी और जांच जारी

आरोपी सुमित बहादुर पांडे को मई 2026 में गिरफ्तार किया गया। फिलहाल वह बिना जमानत हिरासत में है और उस पर इमिग्रेशन से जुड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।

अधिकारियों को शक है कि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी फर्जी सरकारी पहचान और डर का इस्तेमाल कर लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहे हैं। ₹16 करोड़ की यह ठगी डिजिटल सुरक्षा और जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं, ताकि ऐसे संगठित साइबर अपराधों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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