बेलगावी। कर्नाटक में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच एक और बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है, जहां एक कॉलेज लेक्चरर को टेलीग्राम पर बनाए गए फर्जी निवेश ग्रुप के जरिए करीब ₹14 लाख की ठगी का शिकार बना लिया गया।
यह मामला दावणगेरे निवासी 52 वर्षीय कॉलेज लेक्चरर से जुड़ा है, जिन्होंने साइबर, आर्थिक अपराध और नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, पीड़ित को कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ लिया था, जिसे शुरुआत में शेयर बाजार और निवेश सलाह से जुड़ा सामान्य प्लेटफॉर्म बताया गया था।
ग्रुप में मौजूद कई लोगों ने खुद को अनुभवी ट्रेडर और निवेश विशेषज्ञ बताते हुए दावा किया कि स्टॉक मार्केट में “गारंटीड हाई रिटर्न” कमाया जा सकता है। भरोसा जीतने के लिए नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट और ग्राफ भी साझा किए गए, जिससे पीड़ित को यह विश्वास हो गया कि यह एक वास्तविक निवेश अवसर है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
इन झूठे दावों के आधार पर लेक्चरर ने अलग-अलग बैंक खातों में कई किश्तों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे करके उन्होंने कुल करीब ₹14 लाख की राशि कथित निवेश के नाम पर भेज दी।
हालांकि, कुछ समय बाद न तो कोई लाभ मिला और न ही मूल राशि वापस की गई। जब पीड़ित ने सवाल पूछना शुरू किया, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी और अधिक मुनाफे का लालच देकर और निवेश करने का दबाव बनाने लगे।
कुछ दिनों बाद स्थिति और संदिग्ध हो गई जब ग्रुप के कई सदस्य अचानक गायब हो गए या उन्होंने बातचीत पूरी तरह बंद कर दी। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह एक संगठित साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और उन बैंक खातों तथा डिजिटल ट्रांजैक्शनों की जांच की जा रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क हो सकता है, जो सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतता है और धीरे-धीरे बड़ी रकम हड़प लेता है।
इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करते हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “साइबर अपराधी पहले भरोसा बनाते हैं, फिर छोटे-छोटे लाभ दिखाकर पीड़ित को फंसाते हैं और अंत में बड़ी रकम निकाल लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि पीड़ित को लंबे समय तक यह एहसास भी नहीं होता कि उसके साथ धोखा हो रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि “गारंटीड रिटर्न” जैसे शब्द अपने आप में साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा संकेत होते हैं और किसी भी डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म की सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे गिरोह अक्सर फर्जी प्रोफाइल, नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड, और एडिटेड स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल करते हैं ताकि निवेश वास्तविक लगे। वास्तविकता में कोई भी पैसा किसी वैध निवेश में नहीं लगाया जाता।
पिछले कुछ वर्षों में कर्नाटक सहित पूरे देश में टेलीग्राम और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म आधारित निवेश धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। खासकर स्टॉक मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर ऐसे स्कैम तेजी से फैल रहे हैं।
पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और इसमें फर्जी पहचान तथा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि पैसों के स्रोत को छिपाया जा सके।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान निवेश ग्रुप में शामिल होने से पहले पूरी जांच करें और गारंटीड रिटर्न के दावों पर बिल्कुल भरोसा न करें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल जांच जारी है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। उम्मीद जताई जा रही है कि डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।
