फॉरेक्स ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर ₹8.52 करोड़ की साइबर ठगी, मिर्जापुर से आरोपी गिरफ्तार।

फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ₹8.52 करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश, झारखंड की बड़ी कार्रवाई में यूपी के मिर्जापुर से आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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रांची/मिर्जापुर। झारखंड की राजधानी रांची में सामने आए एक बड़े साइबर ठगी मामले में जांच एजेंसियों ने अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। फॉरेक्स ट्रेडिंग में ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर एक व्यक्ति से करीब ₹8.52 करोड़ की साइबर ठगी करने के आरोप में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई झारखंड साइबर अपराध जांच इकाई की ओर से की गई, जिसने शिकायत के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शन और बैंक खातों की परत-दर-परत जांच की।

मामला 10 मार्च को दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया, जब रांची निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दी कि उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी मुद्रा (Forex) ट्रेडिंग में निवेश करने का लालच दिया गया। शुरुआती बातचीत में उसे बताया गया कि कम समय में भारी मुनाफा संभव है, और इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करना होगा।

जांच में सामने आया कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने एक सुनियोजित साइबर जाल बिछाया था। निवेशक को अलग-अलग बैंक खातों में कई किस्तों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में उसे छोटे-छोटे ‘फर्जी लाभ’ दिखाए गए, जिससे उसका भरोसा मजबूत हुआ। बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद पूरा सिस्टम बंद कर दिया गया और संपर्क टूट गया।

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अधिकारियों के अनुसार, जिस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया था, वह पूरी तरह फर्जी था और उसका असली बाजार या किसी वैध वित्तीय संस्था से कोई संबंध नहीं था। जांच में यह भी पता चला कि इस पूरे नेटवर्क में कई बैंक खातों का उपयोग मनी म्यूल (Money Mule) के रूप में किया गया था, ताकि लेनदेन की ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।

झारखंड साइबर जांच इकाई ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से संदिग्ध खातों और IP एड्रेस को ट्रेस किया, जिसके आधार पर मिर्जापुर में आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार किया गया और आगे की पूछताछ जारी है।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले ‘फास्ट रिटर्न इन्वेस्टमेंट’ ऑफर्स सबसे बड़ा जाल होते हैं। इस मामले पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “फॉरेक्स ट्रेडिंग और क्रिप्टो जैसे क्षेत्रों में फर्जी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर साइबर अपराधी निवेशकों को लंबे समय तक भ्रमित करते हैं। शुरुआती मुनाफे का दिखावा एक मनोवैज्ञानिक ट्रिक होती है, जिससे पीड़ित अधिक धन लगाने के लिए प्रेरित होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के अपराधों में अब संगठित डिजिटल नेटवर्क काम कर रहे हैं, जो बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों और मल्टी-लेयर ट्रांजैक्शन का फायदा उठाते हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक बड़ा साइबर ठगी गिरोह सक्रिय होने की आशंका है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे सकता है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य सहयोगियों की पहचान और फंड ट्रेल की जांच जारी है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच करें और अनजान लिंक या सोशल मीडिया ऑफर्स से सतर्क रहें। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

यह मामला एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल निवेश के बढ़ते चलन के साथ साइबर ठग भी अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट कर रहे हैं, जिससे आम निवेशक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

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