कानपुर में राजनीतिक फंड और कमीशन का झांसा देकर स्कूल संचालक दंपती के खातों का इस्तेमाल ₹1.09 करोड़ की साइबर ठगी में किए जाने का मामला सामने आया है।

म्यूल अकाउंट गैंग का भंडाफोड़, सरगना समेत 6 गिरफ्तार; साइबर ठगों को ₹7,000 में बेचते थे बैंक खाते

Team The420
5 Min Read

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराध और अवैध वित्तीय लेन-देन से जुड़े एक बड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। बेकनगंज पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के सरगना समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि यह गैंग लोगों को बैंक लोन दिलाने और अन्य वित्तीय लाभ का झांसा देकर उनके नाम पर खाते खुलवाता था और बाद में उन्हीं खातों को साइबर ठगों और हवाला कारोबार से जुड़े नेटवर्क को बेच देता था।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कर्नलगंज निवासी जावेद (गैंग का सरगना), गुजैनी मर्दनपुर निवासी दीपक शर्मा, काकादेव हितकारी नगर निवासी प्रिंस गौतम, रावतपुर डबल पुलिया निवासी युवराज, चमनगंज निवासी मोहम्मद असद और बर्रा निवासी लक्ष्यदीप शामिल हैं।

एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग आम नागरिकों के दस्तावेज लेकर बैंक खाते खुलवाते हैं और फिर उन खातों को अपने नियंत्रण में लेकर अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करते हैं। सूचना के आधार पर पुलिस और साइबर टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को दबोच लिया।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले छह महीनों में करीब 25 बैंक खाते खोल चुका था। आरोपियों ने इन खातों का संचालन खुद के पास रखा और खाताधारकों से एटीएम कार्ड, पासबुक और रजिस्टर्ड मोबाइल सिम भी अपने कब्जे में ले लिए थे।

पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज लेते थे। इसके बाद बैंक में खाता खुलवाकर सभी जरूरी बैंकिंग उपकरण अपने पास रख लेते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगों को ₹7,000 प्रति खाते की दर से बेच दिया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के कुछ सदस्य डिलीवरी बॉय के रूप में कार्यरत थे, जबकि कुछ प्राइवेट नौकरी करते थे। पुलिस का मानना है कि यह संरचना जानबूझकर बनाई गई थी ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत शक न हो।

आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे साइबर ठगी और हवाला से जुड़े लोगों को ये बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ऑनलाइन फ्रॉड, अवैध ट्रांजेक्शन और धन शोधन जैसे मामलों में किया जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से विभिन्न बैंकों की पांच पासबुक और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और आगे की जांच जारी है।

पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में बैंक कर्मचारियों और उन खाता धारकों से भी पूछताछ की जाएगी जिनके नाम पर खाते खोले गए थे। यदि किसी बैंक कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल अकाउंट नेटवर्क साइबर अपराध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जहां असली अपराधी सीधे सामने नहीं आते बल्कि दूसरों के नाम पर बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इससे न केवल साइबर ठगी को अंजाम देना आसान हो जाता है, बल्कि धन की ट्रेसिंग भी मुश्किल हो जाती है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे नेटवर्क अब संगठित अपराध का रूप ले चुके हैं। उनके अनुसार, “म्यूल अकाउंट्स साइबर फ्रॉड और हवाला लेन-देन की रीढ़ बन चुके हैं। अपराधी सामान्य लोगों को लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते हैं और बाद में उनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन के लिए किया जाता है।”

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को चूंकि मामला सात साल से कम सजा की श्रेणी में आता है, इसलिए उन्हें निजी मुचलके पर थाने से रिहा कर दिया गया है। हालांकि जांच जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर आगे की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार राज्य के अन्य जिलों और संभवतः अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। साइबर सेल अब डिजिटल ट्रांजेक्शन और बैंकिंग रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह की कड़ी तक पहुंचा जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article