मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बैंकिंग सिस्टम के भीतर एक बड़ा वित्तीय गबन सामने आया है, जहां पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सिविल लाइंस शाखा में रिकॉर्ड में हेरफेर कर ₹26.39 लाख से अधिक की रकम के गबन का मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि शाखा में तैनात हेड कैशियर ने ग्राहकों और संस्थाओं से नकदी प्राप्त कर उसकी रसीद तो जारी कर दी, लेकिन रकम बैंक खाते में जमा करने के बजाय उसे निजी उपयोग में ले लिया।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) मुरादाबाद डिपो की ओर से बैंक में जमा की गई राशि खातों में नहीं दिखी। रोडवेज द्वारा बैंक को लगातार शिकायतें भेजी गईं, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू की गई और मामला सामने आया।
बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, रोडवेज डिपो ने 18 अप्रैल 2026 को ₹18,18,716 और 29 अप्रैल 2026 को ₹4,20,808 की नकद राशि बैंक में जमा कराई थी। हालांकि, रोडवेज के पास सभी जमा रसीदें मौजूद होने के बावजूद बैंक के अप्रैल माह के स्टेटमेंट में यह राशि दर्ज नहीं पाई गई। इससे संदेह गहराया और विस्तृत जांच शुरू की गई।
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जांच में सामने आया कि संबंधित तिथियों पर हेड कैशियर सनी भारती ड्यूटी पर मौजूद थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रोडवेज से प्राप्त नकदी को बैंक के खाते में जमा करने के बजाय उसे अपने पास रख लिया और रिकॉर्ड में हेरफेर कर सिस्टम में गलत प्रविष्टियां दर्ज कीं।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि आरोपी ने बाद में बैंक सिस्टम में रिकॉर्ड को अपडेट करने की कोशिश की, लेकिन वास्तविक कैश बैंक के नकद भंडार में मौजूद नहीं था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि लेखा-जोखा और वास्तविक नकदी के बीच भारी अंतर था।
आंतरिक जांच में यह भी पाया गया कि रोडवेज की राशि के अलावा बैंक के कैश बैलेंस में अतिरिक्त ₹3,99,918 की कमी भी दर्ज की गई, जिसे भी इसी हेड कैशियर से जोड़कर देखा जा रहा है। इस प्रकार कुल गबन की राशि ₹26,39,442 तक पहुंच गई।
बैंक प्रबंधन के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने मौखिक रूप से गबन की बात स्वीकार की है। इसके बाद बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा सिविल लाइंस थाने में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बैंक से संबंधित दस्तावेज, कैश रजिस्टर, जमा पर्चियां और डिजिटल रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि गबन की गई राशि का उपयोग कहां और किस तरह किया गया।
जांच एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका या मिलीभगत शामिल है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर नकदी हेरफेर बिना सिस्टम सपोर्ट के संभव नहीं माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम में कैश हैंडलिंग सबसे संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जहां थोड़ी सी चूक भी बड़े वित्तीय नुकसान में बदल सकती है। इस मामले ने एक बार फिर बैंकिंग नियंत्रण और आंतरिक ऑडिट सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और बैंकिंग ट्रांजेक्शन, सीसीटीवी फुटेज तथा कैश मूवमेंट रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
