पुणे। साइबर अपराध की दुनिया से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां म्यांमार के कुख्यात साइबर स्कैम कंपाउंड से रेस्क्यू किए गए तीन युवकों ने भारत लौटने के बाद फिर से वही अपराध शुरू कर दिया। महाराष्ट्र के पिंपरी चिंचवड़ पुलिस ने मार्च में इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों युवक नवी मुंबई, जालंधर और दार्जिलिंग के रहने वाले हैं। कुछ समय पहले इन्हें थाईलैंड सीमा के पास म्यांमार में चल रहे एक बड़े साइबर स्कैम नेटवर्क से बचाया गया था, जहां उन्हें कथित तौर पर साइबर गुलामी में काम करने के लिए मजबूर किया गया था। रेस्क्यू के बाद उम्मीद थी कि वे इस अपराध दुनिया से दूरी बनाएंगे, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया कि भारत लौटने के बाद भी उन्होंने नया साइबर फ्रॉड नेटवर्क खड़ा करने की योजना शुरू कर दी।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पुणे के पास एक फार्महाउस से संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। इसी दौरान पिंपरी चिंचवड़ पुलिस ने छापेमारी कर पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया और तीनों मुख्य आरोपियों के साथ दो स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया।
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जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने कम से कम 120 से अधिक साइबर अपराधों में म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया। इन खातों के जरिए संदिग्ध लेनदेन को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया गया ताकि जांच एजेंसियों को ट्रैकिंग में मुश्किल हो। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन ट्रांजैक्शनों की रकम ₹2 करोड़ से लेकर ₹18 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जबकि वास्तविक आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोपी पहले भी अंतरराष्ट्रीय साइबर स्कैम नेटवर्क का हिस्सा रह चुके हैं। म्यांमार जैसे देशों में सक्रिय साइबर अपराध गिरोह भारतीय युवाओं को नौकरी और बेहतर कमाई का झांसा देकर फंसाते हैं और उन्हें ऑनलाइन ठगी के लिए मजबूर करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि रेस्क्यू के बाद ये युवक अपराध से दूर रहने के बजाय उसी नेटवर्क की तर्ज पर भारत में नया ऑपरेशन शुरू करने में लग गए। उन्होंने फर्जी पहचान और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का इस्तेमाल कर एक संगठित फ्रॉड तंत्र खड़ा किया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध अब सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। रेस्क्यू के बाद भी अपराधियों का फिर से सक्रिय होना एक बड़ी चुनौती बन गया है।”
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क में म्यूल अकाउंट्स की भूमिका बेहद अहम होती है। फर्जी या उधार लिए गए खातों के जरिए पैसों को कई लेयर में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे असली स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार अपराधी आर्थिक दबाव, लालच या संगठित गिरोहों के प्रभाव में आकर दोबारा अपराध की दुनिया में लौट आते हैं। इस तरह के मामलों में निगरानी और पुनर्वास व्यवस्था की कमी भी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आती है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन के स्रोतों की गहराई से जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि भारत में इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
तीनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है।
