कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी और अवैध मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां बर्रा पुलिस ने करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों, शेल फर्मों और कोडवर्ड कम्युनिकेशन के जरिए साइबर अपराध की रकम को ठिकाने लगाने का काम कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क में बैंकिंग सिस्टम से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
पुलिस जांच के दौरान गिरोह के कथित मास्टरमाइंड राजबीर सिंह यादव और एक निजी बैंक के डिप्टी मैनेजर अमित सिंह के बीच हुई व्हाट्सएप चैट हाथ लगी है। अधिकारियों के मुताबिक चैट में “30 किलो माल” डालने जैसी संदिग्ध भाषा का इस्तेमाल किया गया था। जांच में सामने आया कि अगले ही दिन दो अलग-अलग बैंक खातों में करीब ₹30 लाख जमा हुए। पुलिस का दावा है कि गिरोह “किलो” शब्द का इस्तेमाल “लाख रुपये” के कोडवर्ड के रूप में करता था ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
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जांच अधिकारियों के अनुसार यह नेटवर्क साइबर ठगी, हवाला और संदिग्ध कारोबारी लेनदेन की रकम को कई परतों में घुमाकर वैध दिखाने का प्रयास करता था। पुलिस को जांच के दौरान दो कथित फर्जी फर्मों — “अर्जुन नमकीन” और “प्रभु सर्विस” — का पता चला है। अधिकारियों के मुताबिक अर्जुन नमकीन के खाते में करीब ₹5 करोड़ और प्रभु सर्विस के खाते में लगभग ₹9 करोड़ का ट्रांजेक्शन मिला है।
पुलिस का कहना है कि ये बैंक खाते सब्जी विक्रेताओं, सफाई कर्मियों और दिहाड़ी मजदूरों के नाम पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुलवाए गए थे। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, टैक्स चोरी और हवाला नेटवर्क से जुड़ी रकम को इधर-उधर करने में किया गया।
मामले की जांच के दौरान एक्सिस बैंक, उत्कर्ष बैंक समेत अन्य वित्तीय संस्थानों के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कई खातों में असामान्य ट्रांजेक्शन होने के बावजूद संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट नहीं की गई। अब बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज और डिजिटल ट्रांजेक्शन डाटा की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
इसी जांच से जुड़े एक अन्य मामले में पुलिस करीब ₹3200 करोड़ के अवैध लेनदेन नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। इस मामले में महफूज अली के बेटे फैज अली उर्फ “पप्पू छुरी” की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस टीमों ने गोरखपुर और नेपाल सीमा के आसपास कई स्थानों पर दबिश दी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह कथित तौर पर स्लॉटर हाउस संचालकों और स्क्रैप कारोबारियों की अवैध रकम को फर्जी खातों के जरिए घुमाकर सफेद करने का काम करता था। पुलिस को जांच में महफूज अली और उसके रिश्तेदारों के नाम पर 12 अलग-अलग बैंकों में करीब 100 खाते मिलने की जानकारी मिली है। अधिकारियों का दावा है कि कुछ खातों में एक ही दिन में ₹4 करोड़ से ₹6 करोड़ तक का लेनदेन हुआ।
डीसीपी साउथ के अनुसार पुलिस ने अब तक राजबीर और उसके रिश्तेदारों से जुड़े खातों में मौजूद लगभग ₹3.20 करोड़ की रकम फ्रीज करा दी है। मामले में कई बैंक अधिकारियों और कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है।
पुलिस जांच में गोरखपुर, झांसी और दिल्ली के कुछ बड़े स्क्रैप कारोबारियों के नाम भी सामने आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन कारोबारियों पर फर्जी खातों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ लेने और संदिग्ध फंड ट्रांसफर कराने का आरोप है। अब आर्थिक अपराध और साइबर जांच एजेंसियां इन कारोबारी कनेक्शनों की भी विस्तृत जांच कर रही हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर ठगी नेटवर्क अब फर्जी फर्म, डिजिटल बैंकिंग और कोडवर्ड कम्युनिकेशन का इस्तेमाल कर संगठित वित्तीय अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। अपराधी बैंक खातों की लेयरिंग, फर्जी केवाईसी और शेल कंपनियों के जरिए अवैध रकम को वैध दिखाने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में बैंकिंग मॉनिटरिंग, एआई आधारित ट्रांजेक्शन एनालिसिस और मल्टी-एजेंसी डिजिटल फोरेंसिक जांच बेहद जरूरी हो गई है।”
