कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी के दो बड़े मामलों ने ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर चल रहे डिजिटल फ्रॉड नेटवर्क की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है। एक मामले में शेयर बाजार और IPO में निवेश के नाम पर एक कारोबारी से ₹2.22 करोड़ की कथित ठगी की गई, जबकि दूसरे मामले में पार्ट-टाइम ऑनलाइन जॉब का झांसा देकर एक युवक से करीब ₹9 लाख से अधिक की रकम हड़प ली गई। दोनों मामलों में साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली निवेश स्कीमों का इस्तेमाल कर पीड़ितों का भरोसा जीता।
पहला मामला कानपुर के आजाद नगर क्षेत्र का है, जहां सोलर बैटरी कारोबारी अरविंद बागला को कथित तौर पर शेयर बाजार में अधिक मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। पीड़ित के अनुसार जनवरी 2026 में वैदेही देशमुख नाम की एक महिला ने व्हाट्सएप के जरिए उनसे संपर्क किया। महिला ने खुद को एक निवेश सलाहकार कंपनी से जुड़ा बताते हुए दावा किया कि वह मार्केट रेट से 10 से 15 प्रतिशत कम कीमत पर शेयर उपलब्ध कराकर भारी मुनाफा दिला सकती है।
इसके बाद कारोबारी को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां नियमित रूप से ट्रेडिंग टिप्स, निवेश सलाह और कथित मार्केट एनालिसिस साझा किए जाते थे। जांच में सामने आया कि ठगों ने एक लिंक भेजकर पीड़ित के मोबाइल में फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म डाउनलोड कराया और उसके नाम पर एक ऑनलाइन निवेश खाता खोल दिया।
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पीड़ित का आरोप है कि शुरुआती चरण में ऐप पर निवेश बढ़ता हुआ और अच्छा मुनाफा दिखाया गया ताकि भरोसा मजबूत हो सके। साइबर जालसाजों ने कथित तौर पर नकली दस्तावेज, फर्जी एग्रीमेंट और सेबी रजिस्ट्रेशन से जुड़े कागजात भी साझा किए। धीरे-धीरे कारोबारी को म्यूचुअल फंड, IPO और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
पुलिस के अनुसार भरोसे में आने के बाद पीड़ित ने अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹2.22 करोड़ निवेश कर दिए। लेकिन जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो न तो पैसा वापस मिला और कुछ ही समय बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
दूसरा मामला बर्रा क्षेत्र का है, जहां निजी कंपनी में काम करने वाले अजय कुशवाहा को ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया गया। पीड़ित के मुताबिक 9 मार्च को व्हाट्सएप पर अनजान नंबरों से उन्हें घर बैठे कमाई का ऑफर मिला। शुरुआत में ठगों ने यूट्यूब वीडियो रिव्यू करने और स्क्रीनशॉट भेजने जैसे छोटे टास्क दिए।
विश्वास जीतने के लिए शुरुआती टास्क पूरा करने पर उनके खाते में पहले ₹200 और बाद में ₹6500 भेजे गए। इसके बाद जालसाजों ने उन्हें “ओसिस” नाम के एक कथित ट्रेडिंग और टास्क प्लेटफॉर्म से जोड़ा, जहां प्री-पेड टास्क और निवेश के नाम पर पैसे जमा कराने को कहा गया।
पीड़ित ने अधिक कमाई के लालच में अलग-अलग किश्तों में करीब ₹9.09 लाख जमा कर दिए। कुछ समय बाद जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो प्लेटफॉर्म ने अतिरिक्त भुगतान और टैक्स क्लियरेंस के नाम पर और पैसे मांगने शुरू कर दिए। संदेह होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई।
जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों मामलों में साइबर अपराधियों ने सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर पहले भरोसा बनाया और फिर निवेश तथा कमाई के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर कराई। पुलिस अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल वॉलेट की जांच कर रही है जिनमें रकम भेजी गई।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी अब निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर बेहद संगठित तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। शुरुआत में छोटा मुनाफा दिखाकर विश्वास बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम निवेश कराई जाती है। किसी भी अनजान ट्रेडिंग ऐप, व्हाट्सएप निवेश ग्रुप या ऑनलाइन कमाई के ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए। निवेश हमेशा केवल सेबी पंजीकृत प्लेटफॉर्म के जरिए ही करना चाहिए।”
