ग्लोबल मीडिया ऐप निवेश घोटाले में ED ने ₹1.06 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं, जांच में USDT क्रिप्टो ट्रेल और अंतरराष्ट्रीय लिंक सामने आए।

ग्लोबल मीडिया ऐप निवेश घोटाले में बड़ा एक्शन: ₹1.06 करोड़ की संपत्तियां अटैच, करोड़ों के क्रिप्टो ट्रेल का खुलासा

Team The420
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शिलांग। मेघालय से जुड़े चर्चित “ग्लोबल मीडिया ऐप” ऑनलाइन निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹1.06 करोड़ की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है और मामले की जांच अभी जारी है।

जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला एक कथित पोंजी स्कीम से जुड़ा है, जिसमें निवेशकों को फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना कमाई और विज्ञापन देखने पर लाभ का लालच दिया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह ऐप एक विज्ञापन देखने और निवेश आधारित कमाई प्लेटफॉर्म के रूप में प्रचारित किया जा रहा था।

पीड़ितों को शुरुआत में छोटे निवेश पर रिटर्न दिया गया, लेकिन बाद में उन्हें VIP मेंबरशिप और रेफरल सिस्टम के जरिए बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिक रिटर्न के वादे के साथ लोगों से लगातार निवेश करवाया जाता रहा।

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ईडी के अनुसार यह पूरा नेटवर्क टेलीग्राम चैनलों के जरिए संचालित किया जा रहा था, जिनमें विदेशी मोबाइल नंबरों का उपयोग किया गया। निवेशकों से बैंक ट्रांसफर, UPI और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन एकत्र किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि यह ऐप 3 जून 2022 से 12 अक्टूबर 2022 तक सक्रिय रहा और इसके बाद अचानक बंद हो गया, जिससे निवेशकों के पैसे अटक गए।

एजेंसी ने अब तक करीब ₹45.33 करोड़ की अवैध आय का पता लगाया है, जिसे अपराध की आय माना जा रहा है। कई बैंक खाते, मर्चेंट आईडी, पेमेंट गेटवे और क्रिप्टो वॉलेट्स को जांच के दायरे में लिया गया है।

क्रिप्टो ट्रेल की जांच में पाया गया कि बड़ी रकम USDT (Tether) के रूप में TRON ब्लॉकचेन नेटवर्क पर ट्रांसफर की गई थी। इसमें करीब ₹2.45 करोड़ सीधे क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए विदेशी प्लेटफॉर्म तक पहुंचाए गए।

जांच एजेंसियों को यह भी संकेत मिले हैं कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा था। टेलीग्राम चैनलों से जुड़े मोबाइल नंबरों का संबंध कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों से पाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल लालच का उपयोग कर आम लोगों को आसानी से फंसाया जाता है। “आज के साइबर अपराधी तकनीक का उपयोग केवल सिस्टम को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे को तोड़ने के लिए करते हैं। फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और क्रिप्टो नेटवर्क इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं,” ऐसा कहना है प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का।

फिलहाल इस कार्रवाई को जांच के महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क की परतें धीरे-धीरे सामने आ रही हैं।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ऐसे ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म अक्सर शुरुआती चरण में छोटे रिटर्न देकर लोगों का विश्वास जीत लेते हैं और बाद में बड़े निवेश के लिए दबाव बनाते हैं।

इस तरह की ठगी में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इनके जरिए तेजी से बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंच बनाई जाती है।

क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल ने इस तरह के अपराधों को और जटिल बना दिया है क्योंकि डिजिटल वॉलेट और ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए धन की ट्रैकिंग कठिन हो जाती है।

जांच एजेंसी अब विभिन्न देशों की डिजिटल कंपनियों और प्लेटफॉर्म से सहयोग लेकर पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया है कि ऑनलाइन निवेश ऑफर को बिना सत्यापन के स्वीकार करना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि किसी भी प्लेटफॉर्म में निवेश करने से पहले उसकी वैधता और रजिस्ट्रेशन की पूरी जांच जरूर करें।

अंततः यह मामला डिजिटल युग में बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों का एक और बड़ा उदाहरण बन गया है।

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