मेरठ। छावनी क्षेत्र स्थित 510 आर्मी बेस वर्कशॉप में आयोजित ट्रेड्समैन (ग्रुप C) भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय टीमों की संयुक्त कार्रवाई में एक महिला समेत कुल 19 अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन के जरिए नकल करते हुए गिरफ्तार किया गया।
परीक्षा के दौरान शुरुआती मिनटों में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद निगरानी टीम को कई अभ्यर्थियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के बाद यह सामने आया कि कई परीक्षार्थी अपने कपड़ों के अंदर छिपाए गए ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वर से जुड़े हुए थे और प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर रहे थे।
तलाशी अभियान में अभ्यर्थियों के पास से मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला सिर्फ व्यक्तिगत नकल का नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच एजेंसियों को हरियाणा आधारित सॉल्वर गैंग से जुड़े होने की आशंका भी है, जो तकनीकी माध्यमों से परीक्षाओं में नकल कराने का काम करता है।
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गिरफ्तार अभ्यर्थियों ने पूछताछ में अलग-अलग दलीलें दीं। कुछ ने दावा किया कि उन्हें मोबाइल प्रतिबंध की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी और तलाशी ठीक से नहीं हुई। हालांकि जांच में पाया गया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पहले से ही बेहद सावधानी से छिपाए गए थे और परीक्षा शुरू होते ही इन्हें सक्रिय कर दिया गया था, जिससे यह साफ होता है कि यह एक पूर्व नियोजित योजना थी।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में आगरा निवासी राहुल कुमार को भी हिरासत में लिया गया है। उस पर आरोप है कि उसने आर्मी भर्ती के नाम पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से ₹12 लाख की ठगी करने की कोशिश की। जांच में यह भी सामने आया कि एक अन्य व्यक्ति ने राहुल कुमार की पहचान का उपयोग कर परीक्षा में शामिल होने की कोशिश की, जबकि असली राहुल कुमार भी अपने डिजिटल दस्तावेजों के जरिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करने पहुंचा था।
एक ही नाम और एक ही पद के लिए दो अलग-अलग व्यक्तियों की समानांतर गतिविधियों ने पूरे सिस्टम में गंभीर गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की स्थिति को उजागर किया है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल पहचान की हेराफेरी नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में संगठित धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकता है।
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, यह घटना केवल कुछ अभ्यर्थियों की नकल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस उपलब्ध कराने वाले, बाहर से उत्तर भेजने वाले सॉल्वर और भर्ती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
घटना के बाद परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। सभी संदिग्ध अभ्यर्थियों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाहर से उत्तर किस तकनीक के जरिए भेजे जा रहे थे।
इस घटना ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह रैकेट केवल इसी परीक्षा तक सीमित था या इसका दायरा अन्य राज्यों तक फैला हुआ है।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारी यह पता लगाने में लगे हैं कि इस संगठित नकल और फर्जीवाड़े के पीछे कितने लोग शामिल हैं और इस पूरे नेटवर्क की असली जड़ें कहां तक फैली हुई हैं।
