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हैकर्स की घुसपैठ से हिला जल सुरक्षा तंत्र: पोलैंड से अमेरिका तक बढ़ा साइबर खतरा

Team The420
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वारसॉ/वॉशिंगटन। दुनिया भर में तेजी से बढ़ते साइबर हमलों ने अब जल सुरक्षा व्यवस्था को भी खतरे में डाल दिया है। यूरोपीय देश पोलैंड ने खुलासा किया है कि उसके कई वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पर संगठित साइबर हमले किए गए, जहां हैकर्स औद्योगिक कंट्रोल सिस्टम तक पहुंच बनाने में सफल रहे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यदि इन हमलों को समय रहते नहीं रोका जाता, तो पानी की गुणवत्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आवश्यक सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता था।

पोलैंड की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में देश के कम से कम पांच जल शोधन संयंत्रों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि हमलावर केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं थे, बल्कि उनका उद्देश्य उन डिजिटल सिस्टम्स पर नियंत्रण हासिल करना था जो पानी के प्रवाह, केमिकल बैलेंस और सप्लाई संचालन को नियंत्रित करते हैं।

सुरक्षा एजेंसी ने यह भी बताया कि हाल के महीनों में पोलैंड के कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क पर साइबर गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें बिजली ग्रिड, सैन्य ठिकाने, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और सरकारी नेटवर्क शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, यह केवल तकनीकी घुसपैठ नहीं बल्कि “डिजिटल तोड़फोड़” की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

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हालांकि रिपोर्ट में सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन पोलैंड लंबे समय से रूसी समर्थित साइबर गतिविधियों को लेकर सतर्क रहा है। इससे पहले भी पोलैंड के ऊर्जा नेटवर्क और सरकारी सिस्टम्स पर संदिग्ध साइबर हमलों की जांच की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव अब साइबर युद्ध के रूप में भी सामने आ रहे हैं।

यह खतरा केवल पोलैंड तक सीमित नहीं है। अमेरिका भी पिछले कुछ वर्षों में अपने जल और ऊर्जा ढांचे पर गंभीर साइबर खतरों का सामना कर चुका है। वर्ष 2021 में फ्लोरिडा के ओल्ड्समार स्थित एक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में हैकर्स ने घुसपैठ कर पानी में इस्तेमाल होने वाले सोडियम हाइड्रॉक्साइड के स्तर को खतरनाक मात्रा तक बढ़ाने की कोशिश की थी। हालांकि समय रहते ऑपरेटरों ने बदलाव पकड़ लिया और बड़ा हादसा टल गया।

इसके बाद अमेरिकी एजेंसियों FBI और CISA ने कई बार चेतावनी जारी करते हुए कहा कि जल आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़े सिस्टम विदेशी साइबर हमलावरों के लिए “सॉफ्ट टारगेट” बने हुए हैं। हाल ही में अमेरिकी एजेंसियों ने खुलासा किया कि ईरान समर्थित हैकर समूह अमेरिकी जल और ऊर्जा सुविधाओं में इस्तेमाल होने वाले “प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर” यानी PLC सिस्टम्स को निशाना बना रहे हैं। यही सिस्टम पानी के प्रवाह, फिल्ट्रेशन और केमिकल कंट्रोल को संचालित करते हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक औद्योगिक नेटवर्क तेजी से इंटरनेट आधारित तकनीक से जुड़ रहे हैं। इससे संचालन आसान हुआ है, लेकिन साइबर जोखिम भी कई गुना बढ़ गए हैं। यदि कोई हमलावर इन सिस्टम्स पर नियंत्रण हासिल कर ले, तो वह पानी की सप्लाई बाधित कर सकता है, केमिकल लेवल बदल सकता है या पूरे नेटवर्क को बंद कर सकता है।

“Future Crime Research Foundation” से जुड़े एक साइबर रिसर्चर ने कहा कि अब साइबर हमलों का मकसद केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाना नहीं रह गया है। हमलावर ऐसे सिस्टम्स को निशाना बना रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। उनके मुताबिक, पानी, बिजली, ट्रांसपोर्ट और हेल्थकेयर नेटवर्क पर हमले करके किसी देश की सार्वजनिक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को कमजोर किया जा सकता है।

वहीं, प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में “क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर साइबर अटैक” सबसे बड़ा वैश्विक सुरक्षा खतरा बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल आपूर्ति, अस्पताल नेटवर्क, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और बिजली ग्रिड जैसे सेक्टर पर्याप्त साइबर सुरक्षा से लैस नहीं हुए, तो संगठित साइबर गिरोह और दुश्मन देश इन्हें डिजिटल हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया अब पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर “हाइब्रिड वॉरफेयर” के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां साइबर हमले, डिजिटल जासूसी और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर देशों को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर संयुक्त साइबर सुरक्षा सहयोग और औद्योगिक नेटवर्क की मजबूत सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।

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