आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड मामले ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को झकझोर दिया है। Guntur District Cooperative Central (GDCC) Bank की नल्लापाडु ब्रांच से जुड़े कथित फंड दुरुपयोग के मामले में पुलिस ने चार्टर्ड अकाउंटेंट Kunisetty Siva Naveen को गिरफ्तार किया है। आरोपी को गुंटूर शहर के नागरमपालेम इलाके में SBI बैंक के सामने स्थित बस स्टॉप से हिरासत में लिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई गुरुवार को की गई, जिसके बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया और वहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह कदम बैंक के आंतरिक रिकॉर्ड में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन की जांच के बाद उठाया गया।
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जांच की शुरुआत तब हुई जब नल्लापाडु ब्रांच के आंतरिक वित्तीय दस्तावेजों में कई असामान्य और नियमों के विपरीत ट्रांजैक्शन पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला कि कुछ लेन-देन निर्धारित बैंकिंग प्रक्रियाओं और अनुमोदन व्यवस्था का पालन किए बिना किए गए थे। इसके बाद जिला सहकारी बैंकिंग अधिकारियों और पुलिस ने संयुक्त रूप से विस्तृत जांच शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए Crime Control Special (CCS) पुलिस टीम को जांच सौंपी गई। यह कार्रवाई CCS डीएसपी B.V. Madhusudana Rao की निगरानी में और Guntur SP Vakul Jindal के निर्देशों के तहत की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे संभावित फंड डाइवर्जन नेटवर्क का खुलासा करना है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि उसने अपनी पेशेवर वित्तीय जानकारी का इस्तेमाल कर अकाउंटिंग एंट्री में हेरफेर किया और बिना अनुमति के वित्तीय लेन-देन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। हालांकि, अभी तक कथित गड़बड़ी की कुल राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, क्योंकि फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का विश्लेषण जारी है।
इस गिरफ्तारी के बाद सहकारी बैंकिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जांच एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या यह मामला किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है या केवल स्थानीय स्तर पर हुई अनियमितता है। इसके लिए बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सहकारी बैंकों में आंतरिक वित्तीय निगरानी की कमजोरियों को उजागर करता है। जांच टीम यह भी आकलन कर रही है कि यह गड़बड़ी किसी एक व्यक्ति की भूमिका थी या इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और आगे की पूछताछ की संभावना जताई जा रही है। जांच अधिकारी बैंक से जुड़े दस्तावेज, ऑडिट लॉग और लेन-देन की मंजूरी प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा कर रहे हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में फंड अक्सर कई खातों के जरिए घुमाया जाता है, जिससे पूरी ट्रेल को ट्रैक करना बेहद जटिल हो जाता है। इसलिए फॉरेंसिक ऑडिट और डिजिटल फाइनेंशियल एनालिसिस को इस जांच में अहम माना जा रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे उसका पद या पेशेवर स्थिति कुछ भी हो। जांच का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मामले की जांच अभी जारी है और प्रारंभिक निष्कर्ष आने के बाद आगे की दिशा तय की जाएगी।
