राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के पांच राज्यों में संगठित अपराध के खिलाफ एक अभूतपूर्व अभियान चलाते हुए पुलिस ने 48 घंटे में 1000 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर 481 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन गैंग बस्ट-2’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य अंतरराज्यीय गैंग नेटवर्क, अवैध हथियारों की सप्लाई चेन और नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करना बताया जा रहा है।
इस व्यापक अभियान के दौरान भारी मात्रा में हथियार, नकदी और ड्रग्स भी बरामद किए गए, जिससे संगठित अपराध की गहरी जड़ें उजागर हुई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में 130 पिस्तौल, 214 कारतूस, 79 चाकू, 99 लाख रुपये नकद, 24 वाहन और करीब 90 किलोग्राम ड्रग्स बरामद किए गए हैं। यह बरामदगी दर्शाती है कि गैंग नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थे, बल्कि एक बड़े संगठित आपराधिक ढांचे के तहत काम कर रहे थे।
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इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील पहलू शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े 9 आरोपियों की गिरफ्तारी रही। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को जोड़कर उन्हें “कॉन्ट्रैक्ट टेररिज्म” जैसे गंभीर अपराधों के लिए तैयार कर रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के कुछ सदस्यों को सुरक्षा बलों पर हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसमें दिल्ली में चार और उत्तर प्रदेश में एक हमले की योजना शामिल थी। गिरफ्तार युवाओं को दो से पांच लाख रुपये तक का लालच देकर भर्ती किया गया था। इनके संपर्क यूपी के अमरोहा और रामपुर, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ तथा जम्मू-कश्मीर के राजौरी तक फैले हुए पाए गए हैं।
इस अभियान में 30 ऐसे हार्डकोर अपराधियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो देश के कुख्यात गैंगस्टर नेटवर्क जैसे अर्श डल्ला, लॉरेंस बिश्नोई, हाशिम बाबा, नासिर, गोगी गैंग, इरफान छेनू, कपिल सांगवान, काला जठेड़ी, नीरज बवाना, कौशल चौधरी और टिल्लू ताजपुरिया गैंग के लिए काम कर रहे थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन कई महीनों की खुफिया निगरानी और इनपुट के आधार पर तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य एक साथ कई राज्यों में फैले संगठित अपराध नेटवर्क की रीढ़ तोड़ना था, जिसमें पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में इस तरह की संयुक्त कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा, ताकि शहरों और सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय गैंग नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई नए आपराधिक मॉड्यूल, हथियार सप्लाई चैन और विदेशी संपर्कों का भी खुलासा हो सकता है, जिससे आगे और बड़ी कार्रवाई संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित करने का नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां छोटे आर्थिक लालच के जरिए उन्हें बड़े आपराधिक नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है।
इस ऑपरेशन के बाद जब्त हथियारों और ड्रग्स की फॉरेंसिक जांच भी जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन-किन आपराधिक घटनाओं में किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस कार्रवाई से गैंगस्टर नेटवर्क में डर का माहौल बना है और कई सक्रिय अपराधी भूमिगत हो गए हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर फिलहाल असर पड़ा है।
पांच राज्यों में फैले इस संयुक्त अभियान को अब तक की सबसे बड़ी समन्वित पुलिस कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जो संगठित अपराध और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
