मुंबई। ₹177 करोड़ के Torres Jewellery मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम आरोपी Sagar Paresh Mehta को संयुक्त अरब अमीरात से भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुंबई की विशेष PMLA अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय को Mehta के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव राजनयिक माध्यम से UAE भेजने की अनुमति दे दी है। Mehta को करीब दो साल तक फरार रहने के बाद अगस्त 2026 में दुबई में गिरफ्तार किया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश S.V. Sahare ने ED की उस अर्जी को मंजूर किया, जिसमें Mehta को भारत वापस लाने के लिए UAE के केंद्रीय प्राधिकरण के समक्ष प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर अपराध के आरोप हैं और मामले की आगे की कार्रवाई तथा सुनवाई के लिए उसकी मौजूदगी जरूरी है।
ED के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला 9 जनवरी 2025 को Platinum Hern Pvt Ltd और अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया था। यही कंपनी Torres Jewellery ब्रांड के तहत मुंबई और आसपास के इलाकों में कारोबार करती थी। जांच की शुरुआत नवी मुंबई के वाशी स्थित APMC थाने में दर्ज एफआईआर से हुई थी। निवेश योजना के कथित रूप से ध्वस्त होने के बाद शिवाजी पार्क, नवघर और राबोडी थानों में भी अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने सोना, चांदी, हीरे और कीमती रत्नों में निवेश के नाम पर निवेशकों को हर सप्ताह 2 से 9 प्रतिशत तक रिटर्न देने का कथित लालच दिया। नए निवेशक जोड़ने पर बोनस का भी वादा किया गया था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सेमिनार, सोशल मीडिया प्रचार और महंगी कारों तथा हाई-एंड मोबाइल फोन के लकी ड्रॉ जैसे तरीके अपनाए गए। ED का आरोप है कि सिंथेटिक मोइसैनाइट पत्थरों को महंगे निवेश के रूप में पेश किया गया।
6 जनवरी 2025 को भुगतान रुकने के बाद निवेशकों ने दादर, मीरा रोड और नवी मुंबई स्थित Torres Jewellery के शोरूम के बाहर पहुंचकर विरोध किया था। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मार्च 2025 में 27,147 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आठ आरोपियों और 11 वांछित लोगों के नाम शामिल किए गए। पुलिस के अनुसार, 14,157 निवेशकों ने कुल ₹142.58 करोड़ के नुकसान की शिकायत की थी।
ED ने मई में दाखिल अपनी अभियोजन शिकायत में मामले में अपराध से अर्जित रकम यानी Proceeds of Crime ₹177.11 करोड़ बताई और 13 व्यक्तियों तथा संस्थाओं को आरोपी बनाया। जांच एजेंसी का आरोप है कि Mehta की भूमिका कथित तौर पर कारोबार से हासिल नकदी को संभालने में थी। एक अन्य आरोपी कथित हवाला ऑपरेटर Alpesh Khara से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ED ने अदालत को बताया था कि Torres के कर्मचारियों के अनुसार कुछ नकदी “Sagar Mehta and others” को कोडित निर्देशों पर दी जाती थी। एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद रकम हवाला चैनलों के जरिए भेजकर USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदली जाती थी।
Mehta के खिलाफ Interpol के माध्यम से Red Corner Notice जारी किया गया था। ED ने अदालत को बताया कि UAE में उसकी गिरफ्तारी की सूचना Interpol के जरिए भारत के National Central Bureau, New Delhi को मिली थी। अगस्त में दुबई में Red Corner Notice पर कार्रवाई के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद ED ने मुंबई की विशेष अदालत को उसकी गिरफ्तारी की जानकारी दी।
इस मामले में नवंबर 2025 में विशेष PMLA अदालत ने Mehta के अलावा तीन विदेशी आरोपियों—Oleksandr Zapichenko उर्फ Alex, Olena Stoian और Viktoria Kovalenko—के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए थे। ED का कहना था कि आरोपी जांच से बच रहे हैं। Stoian को बाद में Moldova में ट्रेस किया गया था और उसके मामले में भी भारत लाने की अलग प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू हुई।
अब Mehta के UAE से भारत प्रत्यर्पण के लिए राजनयिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि अदालत की अनुमति प्रत्यर्पण की अंतिम मंजूरी नहीं है; UAE में संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसे भारत लाया जा सकेगा। मामले में ED की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
