कोलकाता। न्यू टाउन इलाके में फर्जी कॉल सेंटर के जरिए साइबर ठगी करने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एजेंटों के साथ न्यू टाउन के एक फ्लैट से कथित फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले सात युवक भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोग तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों को निशाना बनाकर व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए आर्थिक लाभ का झांसा देते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तौसीफ आलम, मंजूर आलम, जियाउल रहमान, मोहम्मद मोइनुद्दीन, वन्नापुरम श्रीराम, राठौड़ महेश, कल्थी चरण पांडु, उदय कुमार, कत्रावत अनिल, एम. नरेश और राठौड़ अरुण के रूप में हुई है। पुलिस अब इनसे पूछताछ कर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और कथित साइबर ठगी की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।
जांच की शुरुआत नर्केलडांगा इलाके में संचालित एक दूरसंचार दुकान से संदिग्ध तरीके से सिम कार्ड जारी किए जाने की जानकारी मिलने के बाद हुई। पुलिस के अनुसार, तौसीफ टेलीकॉम नामक दुकान से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे। जांच में इन सिम कार्डों के अलग-अलग साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।
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पुलिस ने सबसे पहले तौसीफ आलम को गिरफ्तार किया। 22 वर्षीय तौसीफ को एमहर्स्ट स्ट्रीट इलाके से पकड़ा गया। पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद मंजूर आलम और जियाउल रहमान को गिरफ्तार किया गया। जांच में आरोप सामने आया कि नेटवर्क से जुड़े लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड हासिल करते थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधों में किया जाता था।
इसके बाद पुलिस की संयुक्त टीम ने न्यू टाउन के ईको पार्क थाना क्षेत्र के हथियारा शरीफ इलाके में एक फ्लैट पर छापा मारा। पुलिस के मुताबिक, फ्लैट में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के सात युवक कथित तौर पर फर्जी कॉल सेंटर चला रहे थे। पुलिस ने मौके से कई मोबाइल फोन, लोगों के नाम और मोबाइल नंबरों वाली एक लॉगबुक तथा अन्य उपकरण बरामद किए।
जांच के अनुसार, कॉल सेंटर से संभावित पीड़ितों को व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए संपर्क किया जाता था। उन्हें आर्थिक लाभ का लालच दिया जाता था और बातचीत के बाद कथित तौर पर अलग-अलग तरीकों से ठगी की जाती थी। पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और लॉगबुक की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों से संपर्क किया और कितने लोग कथित ठगी के शिकार हुए।
पुलिस के सामने अब नेटवर्क के संचालन का पूरा तरीका और इसकी पहुंच का पता लगाना प्रमुख चुनौती है। जांच अधिकारी यह भी पता कर रहे हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुल कितने सिम कार्ड जारी किए गए और उनमें से कितने साइबर अपराधों में इस्तेमाल हुए। साथ ही, सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों और न्यू टाउन स्थित कॉल सेंटर के बीच संपर्क तथा लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
पूछताछ में आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क नंबरों, बैंक खातों और संभावित पीड़ितों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कॉल सेंटर केवल तेलंगाना और आंध्र प्रदेश तक सीमित था या इसके जरिए देश के अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों की जांच से नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और कथित साइबर ठगी की रकम का पता लगाने में मदद मिल सकती है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
