अहमदाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम शामिल होने का झांसा देकर साइबर ठगों ने अहमदाबाद के 67 वर्षीय अकाउंटेंट के तीन बैंक खातों से कथित तौर पर ₹3.20 करोड़ निकाल लिए। ठगी के लिए व्हाट्सऐप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी। पीड़ित ने फाइल खोलने के बाद फोन पर कोई खास गतिविधि नहीं देखी और उसे बंद कर दिया, लेकिन पुलिस को संदेह है कि इसी दौरान मोबाइल और उससे जुड़े बैंक खातों की जानकारी तक ठगों की पहुंच बनी।
मामले की शिकायत अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में दर्ज कराई गई है। पुलिस लेनदेन के साथ-साथ लाभार्थी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी एपीके किस तरह तैयार और प्रसारित किया गया तथा रकम हासिल करने वाले खातों को कौन संचालित कर रहा था।
शिकायत के मुताबिक एलिसब्रिज निवासी दिलीपभाई चिनुभाई शाह को 10 सितंबर को उनके परिचित गैरेज संचालक के नंबर से व्हाट्सऐप संदेश मिला। संदेश में दावा किया गया था कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों में शामिल किया गया है। साथ में एक एपीके फाइल भेजी गई थी। शाह ने फाइल खोलकर देखी, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर कुछ दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने फाइल बंद कर दी।
पुलिस को आशंका है कि एपीके खोलने के बाद फोन से बैंकिंग संबंधी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई। शाह का मोबाइल नंबर उनके अपने पंजाब नेशनल बैंक खाते के अलावा उनकी पत्नी शिल्पा के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते और उनके मित्र प्रवीण चंद्र पटेल के बैंक ऑफ इंडिया खाते से भी जुड़ा था। कथित तौर पर ठगों ने इन तीनों खातों को निशाना बनाया।
ठगी का पता 19 सितंबर को चला। शाह के बेटे जैनम दो चेक जमा करने गए थे। इनमें एक चेक पिता के पंजाब नेशनल बैंक खाते से ₹2.21 लाख और दूसरा मां के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से ₹1.99 लाख का था। दोनों चेक अपर्याप्त राशि के कारण लौट गए। जानकारी मिलने पर शाह ने मोबाइल बैंकिंग ऐप से खातों की स्थिति देखी तो उनके खाते में करीब ₹10 हजार और पत्नी के खाते में केवल ₹635 बचे थे।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
इसके बाद उन्होंने मित्र प्रवीण चंद्र पटेल से उनके बैंक खाते के बारे में जानकारी ली। इसी दौरान पटेल के बैंक ऑफ इंडिया खाते से ₹10 हजार कटने का संदेश भी सामने आया। परिवार को मोबाइल के साथ छेड़छाड़ की आशंका हुई। इसके बाद साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई गई। अगले दिन शाह और पटेल के भाई ने बैंक ऑफ इंडिया खाते की भी जांच की, जहां से कथित तौर पर रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई।
शिकायत में दर्ज लेनदेन के अनुसार 12 से 21 सितंबर के बीच तीनों खातों से बड़ी संख्या में आईएमपीएस के जरिये रकम अलग-अलग लाभार्थी खातों में भेजी गई। इन लेनदेन में ₹1,000 से लेकर ₹99,999 तक की रकम शामिल थी। कई बार ₹10 हजार, ₹15 हजार, ₹20 हजार और ₹30 हजार जैसी रकम भेजी गई, जबकि कुछ लेनदेन में इससे अधिक राशि भी स्थानांतरित की गई। सभी कथित लेनदेन को मिलाकर नुकसान करीब ₹3.20 करोड़ बताया गया है।
साइबर सेल अब रकम के प्रवाह की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि तीनों खातों से रकम किन-किन खातों में पहुंची, उन खातों से आगे कहां भेजी गई और संबंधित मोबाइल नंबर तथा उपकरण किसके नियंत्रण में थे। पुलिस एपीके के स्रोत और उसे पीड़ित तक पहुंचाने वाले डिजिटल माध्यम की भी पड़ताल कर रही है।
मामले में पुलिस ने कथित तौर पर मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच बनाकर बैंक खातों से रकम स्थानांतरित किए जाने की आशंका जताई है। हालांकि जांच पूरी होने तक यह स्पष्ट नहीं है कि मोबाइल में किस तकनीकी तरीके से सेंध लगाई गई और पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साइबर सेल ने डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
