वॉशिंगटन। एलन मस्क के सोशल मीडिया मंच एक्स पर यूरोपीय संघ की ओर से लगाए गए ₹1,140 करोड़ के जुर्माने को लेकर अमेरिका और ईयू आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने यूरोपीय संघ की सामान्य अदालत में एक्स की ओर से दायर कानूनी चुनौती का समर्थन किया है। एक्स ने इस कार्रवाई के तहत यूरोपीय आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने को रद्द करने की मांग की है। अमेरिका का समर्थन मिलने के बाद मामला सिर्फ एक डिजिटल मंच पर लगाए गए आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीमा पार डिजिटल नियमन और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर यूरोपीय नियमों के दायरे को लेकर बड़ा कानूनी मुद्दा बन गया है।
यूरोपीय आयोग ने एक्स पर €120 मिलियन यानी करीब ₹1,140 करोड़ का जुर्माना लगाया था। यह कार्रवाई डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत एक्स के अनुपालन को लेकर करीब दो साल चली जांच के बाद की गई। यूरोपीय नियामकों ने कहा था कि एक्स ने डिजिटल नियमों से जुड़े कई दायित्वों का पालन नहीं किया। जांच में मंच की ब्लू चेकमार्क व्यवस्था, पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन से जुड़े पहलुओं को भी देखा गया।
ईयू के नियामकों के मुताबिक, एक्स की ब्लू चेकमार्क व्यवस्था उपयोगकर्ताओं के बीच किसी खाते की विश्वसनीयता को लेकर भ्रम पैदा कर सकती थी। उनका कहना था कि इस तरह की व्यवस्था से उपयोगकर्ता ठगी या हेरफेर के जोखिम में पड़ सकते हैं। इसके अलावा नियामकों ने कंपनी की पारदर्शिता और अपने डिजिटल संचालन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के तरीके को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की थीं।
डिजिटल सर्विसेज एक्ट यूरोपीय संघ का प्रमुख डिजिटल नियमन है, जिसके तहत बड़ी ऑनलाइन कंपनियों को अवैध और हानिकारक सामग्री से जुड़े जोखिमों से निपटने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। नियमों का उल्लंघन होने पर यूरोपीय आयोग कंपनियों पर आर्थिक दंड लगा सकता है। एक्स के खिलाफ लगाया गया जुर्माना इसी व्यवस्था के तहत हुई प्रमुख कार्रवाई में शामिल है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में एक्स की चुनौती का समर्थन करते हुए यूरोपीय आयोग के नियामकीय अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया है। अमेरिकी सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट शूमेट ने कहा कि यूरोपीय आयोग ने अमेरिकी कंपनियों पर ऐसी नियामकीय शक्ति लागू करने की कोशिश की है, जो यूरोपीय संघ के क्षेत्र में मौजूद या प्रत्यक्ष रूप से संचालित नहीं हैं। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि यूरोपीय नियमों के ऐसे व्यापक इस्तेमाल से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर उनके घरेलू अधिकार क्षेत्र से बाहर भी महत्वपूर्ण दायित्व पड़ सकते हैं।
वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं। यूरोप में सेवाएं देने वाली अमेरिकी ऑनलाइन कंपनियां और डिजिटल सेवा प्रदाता भविष्य में इसी तरह के नियामकीय दायित्वों के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में एक्स की कानूनी चुनौती को अमेरिकी कंपनियों के लिए यूरोपीय डिजिटल नियमों की सीमा तय करने वाली महत्वपूर्ण लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
यूरोपीय आयोग ने अमेरिकी आपत्तियों के बावजूद अपने रुख का बचाव किया है। आयोग के प्रवक्ता थॉमस रेनियर ने कहा कि यूरोपीय संघ को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने और उन्हें लागू करने का संप्रभु अधिकार है। उनके अनुसार, आयोग डिजिटल सर्विसेज एक्ट को वस्तुनिष्ठ और पारदर्शी तरीके से लागू कर रहा है और अदालत में लगाए गए जुर्माने का बचाव करेगा।
डिजिटल नियमन को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय डिजिटल कानूनों को लेकर चिंता जताई है कि इनसे अमेरिकी कंपनियों पर अतिरिक्त अनुपालन बोझ पड़ सकता है। वहीं ईयू का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन मंचों को जवाबदेह बनाना, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाना और डिजिटल सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
मस्क की राजनीतिक और कारोबारी गतिविधियां भी इस मामले की पृष्ठभूमि में चर्चा में हैं। मस्क 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मान में आयोजित राजकीय रात्रिभोज में शामिल हुए थे। हालांकि, यूरोपीय आयोग ने संकेत दिया है कि एक्स से जुड़े इस कानूनी विवाद का व्यापक अमेरिका-ईयू संबंधों पर असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। आयोग के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अन्य मुद्दों पर बातचीत और सहयोग जारी रह सकता है।
अब यूरोपीय संघ की सामान्य अदालत एक्स की चुनौती पर सुनवाई करेगी। अदालत के सामने एक ओर ₹1,140 करोड़ के जुर्माने की वैधता का सवाल होगा, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ के डिजिटल कानूनों के अधिकार क्षेत्र से जुड़े तर्क भी महत्वपूर्ण होंगे। मामले का फैसला यह तय करने में अहम हो सकता है कि यूरोपीय संघ अपने क्षेत्र के उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों पर किस सीमा तक अपने नियम लागू कर सकता है।
इस विवाद में इसलिए भी व्यापक महत्व है क्योंकि डिजिटल मंचों का कारोबार राष्ट्रीय सीमाओं से कहीं आगे फैल चुका है, जबकि उनके लिए बनाए गए नियम अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हैं। एक्स के खिलाफ कार्रवाई और उसके समर्थन में अमेरिकी न्याय विभाग की अदालत में मौजूदगी ने इस सवाल को केंद्र में ला दिया है कि वैश्विक डिजिटल कंपनियों के लिए नियामकीय सीमाएं कहां तक तय की जा सकती हैं।
