नई दिल्ली। अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर ट्रंप प्रशासन ने आने वाले एक साल में बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं। विदेशी श्रमिकों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े, श्रमिकों के शोषण और संभावित मानव तस्करी की जांच के बीच अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा है कि अगले 365 दिनों में विदेशी श्रम वीजा कार्यक्रम मौजूदा व्यवस्था से काफी अलग दिखाई दे सकता है। हालांकि, उन्होंने H-1B कार्यक्रम को समाप्त करने की घोषणा नहीं की है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि जांच, कंपनियों पर कार्रवाई और नीतिगत सख्ती आगे भी जारी रह सकती है।
डी’एस्पोसिटो ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें लगता है कि एक साल बाद विदेशी श्रम वीजा कार्यक्रम आज की तुलना में “बहुत अलग” होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अमेरिकी जनता के सामने यह रखने की कोशिश कर रही है कि जांचकर्ताओं के अनुसार विदेशी श्रम व्यवस्था में क्या हो रहा है। उनके मुताबिक यह केवल कागजी रिकॉर्ड या प्रशासनिक हिसाब-किताब का मामला नहीं है, बल्कि जांच में वास्तविक गतिविधियों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
दर्जनों समन और तलाशी वारंट
अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय ने विदेशी श्रम कार्यक्रमों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की देशव्यापी जांच तेज कर दी है। 18 सितंबर को जारी बयान के अनुसार, जांचकर्ताओं ने दर्जनों समन जारी किए और तलाशी वारंट भी निष्पादित किए। विभाग ने यह भी बताया कि आपराधिक जांच लंबित रहने तक Cognizant और Cloudera से जुड़े वीजा आवेदनों को निलंबित किया गया है।
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डी’एस्पोसिटो के मुताबिक जांच का दायरा उन कंपनियों और प्रक्रियाओं तक बढ़ाया जा रहा है, जिनके बारे में जांचकर्ताओं को विदेशी श्रम कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने कहा कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधनों और समय की जरूरत है तथा प्रशासन अपना मामला तैयार कर रहा है।
व्हाइट हाउस ने भी बढ़ाई निगरानी
H-1B कार्यक्रम पर महानिरीक्षक की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब व्हाइट हाउस ने भी इस वीजा व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। 18 सितंबर के एक कार्यकारी आदेश में श्रम विभाग, गृह सुरक्षा विभाग और विदेश विभाग को निर्देश दिया गया है कि H-1B आवेदन की समीक्षा के दौरान यह देखा जाए कि संबंधित नियोक्ता ने समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं।
आदेश में श्रम विभाग के वेज एंड ऑवर डिवीजन को पहले जमा किए गए लेबर कंडीशन एप्लीकेशन की भी समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई पर विचार करने को कहा गया है। लेबर कंडीशन एप्लीकेशन H-1B प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के वेतन और रोजगार की शर्तों से संबंधित जानकारी देता है।
कुछ H-1B आवेदनों पर 1 लाख डॉलर का भुगतान
अमेरिकी प्रशासन ने कुछ H-1B कर्मचारियों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंध को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है। इसके तहत अमेरिका से बाहर मौजूद कुछ श्रमिकों से संबंधित H-1B याचिकाओं के लिए सामान्य तौर पर 1 लाख डॉलर यानी करीब ₹84 लाख के भुगतान की आवश्यकता बताई गई है। हालांकि, इस व्यवस्था में कुछ निर्धारित अपवाद भी हैं।
व्हाइट हाउस ने दावा किया है कि पहले लागू किए गए प्रतिबंध के बाद सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों से आने वाले H-1B पंजीकरण में 92 प्रतिशत की गिरावट आई। प्रशासन ने यह भी कहा कि वाणिज्य दूतावास के जरिए प्रक्रिया पूरी करने से जुड़े अनुरोधों में भी बड़ी कमी आई है। ये आंकड़े अमेरिकी प्रशासन द्वारा बताए गए हैं।
भारतीय आवेदकों पर भी असर की नजर
H-1B वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले अन्य विदेशी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में विदेशी श्रम कार्यक्रमों की जांच बढ़ने और कंपनियों पर निगरानी सख्त होने से H-1B आवेदन प्रक्रिया में बदलाव की संभावना पर भारतीय पेशेवरों और नियोक्ताओं की नजर बनी हुई है। हालांकि, मौजूदा बयानों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि भविष्य में कार्यक्रम का अंतिम स्वरूप क्या होगा।
डी’एस्पोसिटो ने H-1B कार्यक्रम खत्म करने की कोई घोषणा नहीं की है। उनका बयान मुख्य रूप से जारी जांच, कंपनियों पर संभावित कार्रवाई और आने वाले समय में नीतिगत बदलावों की संभावना की ओर संकेत करता है। जांच आगे बढ़ने के साथ अमेरिकी प्रशासन की ओर से नियमों, आवेदन प्रक्रिया और विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने वाली कंपनियों के अनुपालन को लेकर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।
