मुरादाबाद। देशभर में लोगों को APK फाइल भेजकर और निवेश के नाम पर कथित साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 13 सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में बरेली के पूर्व डिप्टी जेलर जुल्फेकार अली का बेटा मोहम्मद दनियाल भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरोह पिछले करीब चार वर्षों से साइबर ठगी कर रहा था और इस दौरान 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठग चुका है। आरोपियों के कब्जे से 26 हजार रुपये नकद, लैपटॉप, सिम कार्ड और दो कारें बरामद की गई हैं। गिरोह का सरगना अभी फरार बताया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश से जुड़े हैं। इनकी पहचान श्रीनिवास लू, विविध पटेरिया, दिव्यम कुमार, अरमान शाह, सतेंद्र कुमार, राजकुमार, मंजीत सिंह उर्फ नन्हे, शिवम विश्वास, मोहम्मद दनियाल, दलवीर चौहान, आजम, सुमित और महेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य किसी एक शहर में लंबे समय तक नहीं रुकते थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी करीब एक महीने के लिए किसी शहर में ठिकाना बनाते और स्थानीय संपर्कों की मदद से म्यूल बैंक खाते हासिल करते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाने और बाद में उसे दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
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पुलिस का कहना है कि आरोपी जिस घर या होटल में ठहरते थे, वहां बैठकर सीधे लोगों को फोन कर ठगी नहीं करते थे। जब साइबर अपराध को अंजाम देना होता था, तो वे कारों से सड़क पर निकल जाते थे। इसके बाद मोबाइल और अन्य उपकरणों के जरिए ठगी की गतिविधियां संचालित करते थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस तरीके से आरोपी अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश करते थे।
गिरोह के काम करने का एक प्रमुख तरीका APK फाइलों और निवेश योजनाओं से जुड़ा बताया गया है। आरोपियों पर ऐसे लिंक या फाइल लोगों तक पहुंचाने और उन्हें निवेश के नाम पर पैसे लगाने के लिए तैयार करने का आरोप है। ठगी की रकम अलग-अलग म्यूल खातों में पहुंचने के बाद उसे कई खातों के जरिए आगे भेजा जाता था, जिससे पैसे के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
पुलिस के अनुसार, गिरोह अब मुरादाबाद में नया ठिकाना बनाने की तैयारी में था। इसी दौरान पुलिस को उनके बारे में जानकारी मिली। इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस ने सोनकपुर पुल के पास वाहनों की जांच शुरू की। दो कारों में सवार संदिग्धों को रोककर पूछताछ की गई और जांच के बाद 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि आरोपियों ने अब तक 5,000 से अधिक म्यूल बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम पहुंचाई। इन खातों से रकम को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन खातों की बैंकिंग गतिविधियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के संपर्क दुबई और अन्य खाड़ी देशों में बैठे साइबर ठगों से भी थे। कथित तौर पर विदेश में बैठे ठग साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाली रकम को भारत में म्यूल खातों तक पहुंचाने के लिए इस नेटवर्क पर निर्भर थे। हालांकि, विदेश में बैठे संदिग्धों की भूमिका और नेटवर्क की पूरी संरचना की पुष्टि के लिए आगे की जांच जारी है।
पुलिस अब बरामद लैपटॉप, सिम कार्ड और मोबाइल उपकरणों की डिजिटल जांच के साथ बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, म्यूल खाता उपलब्ध कराने वालों और विदेश में बैठे संदिग्धों तक पहुंचना है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच से देशभर में की गई कथित ठगी के मामलों का और पता चल सकता है। मामले में गिरोह के फरार सरगना की तलाश भी जारी है।
