फर्जी नंबर से संपर्क कर छोटा भुगतान करवाया, मोबाइल हैक कर मिनटों में खाली किए बैंक खाते; शहर में बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाएं

“गैस बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी: ₹2 की ट्रिक से वकील के खाते से ₹1.98 लाख उड़ाए”

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By Roopa
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प्रयागराज। शहर में गैस बुकिंग के नाम पर साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महज ₹2 के ऑनलाइन भुगतान के जरिए एक अधिवक्ता के बैंक खाते से ₹1.98 लाख उड़ा लिए गए। यह घटना न सिर्फ साइबर अपराधियों के नए तरीकों को उजागर करती है, बल्कि आम लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

गूगल सर्च से शुरू हुआ पूरा जाल

अशोक नगर निवासी अधिवक्ता रविंद्र सिंह के अनुसार, उन्होंने एक मई को गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए इंटरनेट पर मोबाइल नंबर सर्च किया। सर्च के दौरान मिले नंबर पर कॉल करने पर दूसरी ओर से व्यक्ति ने खुद को गैस एजेंसी से जुड़ा कर्मचारी बताया।

बातचीत के दौरान आरोपी ने भरोसा दिलाया कि गैस बुकिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए केवल ₹2 का ऑनलाइन भुगतान करना होगा, जिसे “वेरिफिकेशन फीस” बताया गया। पीड़ित ने बिना संदेह किए बताए गए माध्यम से ₹2 ट्रांसफर कर दिए।

₹2 की पेमेंट बनी ठगी का दरवाजा

जैसे ही यह छोटी राशि ट्रांसफर की गई, उसी क्षण पीड़ित का मोबाइल फोन साइबर ठगों के नियंत्रण में चला गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की प्रक्रिया में अक्सर स्क्रीन शेयरिंग, मैलवेयर लिंक या फर्जी पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल किया जाता है।

मोबाइल एक्सेस मिलते ही ठगों ने पीड़ित के बैंक खातों में प्रवेश कर लिया और कुछ ही मिनटों में दो अलग-अलग खातों से कई ट्रांजक्शन कर कुल ₹1,98,902 निकाल लिए।

पीड़ित को देर से हुआ अहसास

रकम निकलने के बाद पीड़ित को बैंक से ट्रांजक्शन अलर्ट मिलने लगे, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन तब तक पूरी रकम खातों से निकल चुकी थी।

यह घटना दिखाती है कि साइबर अपराधी अब बेहद छोटी रकम का लालच देकर या औपचारिक प्रक्रिया के नाम पर यूजर्स को जाल में फंसा रहे हैं।

साइबर ठगों के बदलते तरीके

विशेषज्ञों का कहना है कि अब साइबर अपराधी सीधे बड़ी रकम मांगने के बजाय छोटे ट्रांजक्शन के जरिए भरोसा बनाते हैं। “₹2” जैसे छोटे अमाउंट का इस्तेमाल यूजर को सुरक्षित महसूस कराने के लिए किया जाता है।

इसके बाद या तो डिवाइस एक्सेस लिया जाता है या यूजर की बैंकिंग जानकारी चुपचाप हासिल कर ली जाती है। गैस बुकिंग, KYC अपडेट, बिजली बिल, या बैंक वेरिफिकेशन जैसे बहाने इस समय सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, “आज के समय में साइबर अपराधी बेहद चालाकी से छोटे पेमेंट को एंट्री पॉइंट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे ही यूजर भरोसा करता है, वे सोशल इंजीनियरिंग के जरिए उसके डिवाइस या अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं और बड़े स्तर पर वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

पुलिस जांच में जुटी

मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। संबंधित मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ट्रांजक्शन डिटेल्स की जांच की जा रही है। साइबर सेल की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क का खुलासा किया जा सकता है।

कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से

विशेषज्ञों की सलाह है कि गैस बुकिंग या किसी भी सेवा के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें। गूगल सर्च से मिले अनजान नंबरों पर भरोसा करने से बचें।

किसी भी कॉल या मैसेज के जरिए पेमेंट करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। साथ ही, किसी भी लिंक पर क्लिक करने या स्क्रीन शेयरिंग की अनुमति देने से बचें।

डिजिटल सतर्कता ही सुरक्षा

गैस बुकिंग जैसे सामान्य काम के बहाने हो रही यह ठगी दिखाती है कि साइबर अपराध अब रोजमर्रा की जिंदगी में गहराई तक पहुंच चुका है। ऐसे में जरूरी है कि लोग हर डिजिटल लेनदेन में सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रिपोर्ट करें।

बढ़ते मामलों के बीच यह साफ है कि जागरूकता और सावधानी ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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