महाराष्ट्र के ठाणे में सामने आया मामला; ‘कीमती सामान’ भेजने के नाम पर वसूले पैसे, साइबर ठगों का पुराना लेकिन खतरनाक तरीका फिर सक्रिय

“विदेश से पार्सल का झांसा, ₹16 लाख की ठगी: डिलीवरी फ्रॉड में बुजुर्ग महिला बनी शिकार”

Roopa
By Roopa
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ठाणे। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच महाराष्ट्र के ठाणे से एक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां 61 वर्षीय एक महिला से ‘विदेश से पार्सल डिलीवरी’ के नाम पर ₹16 लाख की ठगी कर ली गई। पीड़िता, जो पहले दुबई में नैनी के रूप में काम कर चुकी है, को ठगों ने कथित तौर पर एक ऐसे पार्सल का लालच दिया जिसमें महंगे सामान होने का दावा किया गया था।

जांच के अनुसार, इस ठगी की शुरुआत एक फोन कॉल और ऑनलाइन संपर्क से हुई, जिसमें महिला को बताया गया कि उसके नाम पर विदेश से एक पार्सल भेजा गया है। ठगों ने दावा किया कि इस पार्सल में कीमती गिफ्ट और नकदी है, लेकिन इसे कस्टम क्लियरेंस और अन्य औपचारिकताओं के चलते रोक लिया गया है। पार्सल को रिलीज कराने के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करने की बात कही गई।

शुरुआत में पीड़िता से छोटी रकम मांगी गई, जिसे उसने बिना ज्यादा संदेह के ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद ठगों ने लगातार नए-नए शुल्क—जैसे कस्टम ड्यूटी, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और सुरक्षा चार्ज—के नाम पर पैसे मांगना शुरू कर दिया। हर बार यह भरोसा दिलाया गया कि यह अंतिम भुगतान है और इसके बाद पार्सल डिलीवर कर दिया जाएगा।

धीरे-धीरे यह रकम बढ़ती गई और अंततः महिला ने कुल ₹16 लाख तक ट्रांसफर कर दिए। हालांकि, इसके बावजूद न तो पार्सल मिला और न ही ठगों की ओर से कोई ठोस जवाब मिला। जब ठगों ने संपर्क करना बंद कर दिया, तब पीड़िता को शक हुआ कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी है।

इसके बाद महिला ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। मामला दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित साइबर ठगी है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय पार्सल और कस्टम प्रक्रिया का झांसा देकर लोगों को फंसाया जाता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस तरह के मामलों में ठग अक्सर विदेशी नंबरों, फर्जी ईमेल आईडी और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि पीड़ित को यह लगे कि पूरा प्रोसेस वैध है। कई बार पार्सल से जुड़ी फर्जी रसीदें और ट्रैकिंग डिटेल्स भी भेजी जाती हैं, जिससे भरोसा और बढ़ जाता है।

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साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ‘डिलीवरी फ्रॉड’ कोई नया तरीका नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में इसमें तकनीकी बदलाव के साथ इसे और ज्यादा विश्वसनीय बना दिया गया है। लोग लालच या उत्सुकता में आकर बिना सत्यापन किए भुगतान कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “इस तरह के मामलों में ठग ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का इस्तेमाल करते हैं। वे पहले एक आकर्षक या भावनात्मक कहानी बनाते हैं—जैसे विदेश से गिफ्ट या पार्सल—और फिर धीरे-धीरे पीड़ित को भुगतान के जाल में फंसा देते हैं। एक बार पैसा भेजना शुरू हो जाए, तो वे बार-बार नए कारण बताकर रकम बढ़ाते रहते हैं।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी अनजान पार्सल, खासकर विदेश से आने वाले सामान के नाम पर मांगे गए भुगतान को तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए। “कोई भी वैध कूरियर या कस्टम एजेंसी व्यक्तिगत खातों में पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती,” उन्होंने कहा।

अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह के झांसों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ईमेल पर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के पीछे कौन लोग हैं और क्या इस तरह की ठगी के अन्य मामले भी इससे जुड़े हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं, और सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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