नई दिल्ली। डिजिटल युग में जहां स्मार्टफोन ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं स्पैम कॉल्स का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक ताजा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया में सबसे ज्यादा स्पैम कॉल से प्रभावित देशों की सूची में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा देश में बढ़ते डिजिटल जोखिमों और साइबर खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान दुनियाभर में 68 अरब से अधिक स्पैम और धोखाधड़ी से जुड़े कॉल्स की पहचान की गई। इनमें भारत की हिस्सेदारी काफी बड़ी है, जहां करीब 66 प्रतिशत यूजर्स ने ऐसे कॉल्स का सामना किया। यह स्पष्ट संकेत है कि अब स्पैम कॉल्स केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या बन चुकी है।
किन देशों में सबसे ज्यादा असर
स्पैम कॉल्स के मामले में इंडोनेशिया पहले स्थान पर है, जबकि चिली, वियतनाम और ब्राजील इसके बाद आते हैं। भारत पांचवें स्थान पर है, जिससे साफ है कि यह समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से फैल रही है और किसी एक देश तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार, डेटा लीक और मोबाइल उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या इस समस्या को और गंभीर बना रही है। भारत जैसे बड़े यूजर बेस वाले देश में इसका प्रभाव अधिक व्यापक है।
भारत में किस तरह के स्पैम कॉल ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा स्पैम कॉल्स व्यावसायिक विज्ञापनों और टेलीमार्केटिंग से जुड़े होते हैं, जो कुल कॉल्स का करीब 36 प्रतिशत हैं। इनमें बीमा, लोन, क्रेडिट कार्ड और अन्य सेवाओं के प्रचार शामिल होते हैं।
इसके अलावा लगभग 18 प्रतिशत कॉल्स वित्तीय सेवाओं से संबंधित होते हैं, जबकि करीब 12 प्रतिशत कॉल्स सीधे धोखाधड़ी की श्रेणी में आते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों से पैसे या गोपनीय जानकारी हासिल करना होता है।
कैसे काम करते हैं स्पैम कॉलर
स्पैम कॉलर आमतौर पर ऑटो-डायलिंग सिस्टम और बड़े डेटा बेस का इस्तेमाल करते हैं। कई बार यूजर्स का डेटा लीक हो जाता है या अवैध तरीके से खरीदा जाता है, जिसके बाद उन्हें निशाना बनाया जाता है।
धोखाधड़ी वाले कॉल्स में कॉलर खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। हाल के समय में “डिजिटल अरेस्ट”, “KYC अपडेट” और “लोन अप्रूवल” जैसे बहाने बनाकर लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़े हैं।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, स्पैम कॉल्स अब केवल परेशान करने वाली चीज नहीं रह गई हैं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय खतरा बन चुकी हैं। Prof. Triveni Singh, प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी, के अनुसार, “आज स्पैम कॉल्स के जरिए बड़े स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है। साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों पर मानसिक दबाव बनाते हैं और उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, बैंक या सरकारी अधिकारी बताकर डर का माहौल बनाते हैं, जिससे लोग बिना सोचे-समझे अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं।
कैसे बचें स्पैम कॉल्स से
स्पैम कॉल्स से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अनजान नंबर से आने वाले कॉल्स पर सावधानी बरतें और किसी भी स्थिति में अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें। मोबाइल में मौजूद कॉल ब्लॉकिंग फीचर का इस्तेमाल करें और संदिग्ध नंबरों को तुरंत ब्लॉक करें।
इसके अलावा, अपने मोबाइल नंबर को अनजान वेबसाइट्स या ऐप्स पर साझा करने से बचें। यदि कोई कॉल संदिग्ध लगे, तो उसकी शिकायत जरूर करें, ताकि अन्य लोग भी इससे सुरक्षित रह सकें।
बढ़ती चुनौती, जरूरी सतर्कता
स्पैम कॉल्स का बढ़ता आंकड़ा यह दिखाता है कि डिजिटल सुरक्षा अब एक जरूरी आवश्यकता बन चुकी है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित हो रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
