बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में लोन दिलाने के नाम पर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी से ₹2 करोड़ का बैंक लोन दिलाने का झांसा देकर ₹3.55 लाख की ठगी कर ली गई। पीड़ित की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पूर्व में बैंक से जुड़े रह चुके हैं और इसी अनुभव का फायदा उठाकर उन्होंने यह फर्जीवाड़ा किया।
बड़े लोन का लालच बना जाल
कालीबाड़ी निवासी कारोबारी उत्कर्ष अग्रवाल ने शिकायत में बताया कि बिहारीपुर निवासी नवनीत, अनुराग कक्कड़ और विजय ने उनसे संपर्क किया था। आरोपियों ने दावा किया कि उनके बैंकिंग नेटवर्क और अनुभव के चलते वे आसानी से ₹2 करोड़ तक का लोन स्वीकृत करवा सकते हैं।
व्यवसाय विस्तार की योजना बना रहे पीड़ित के लिए यह प्रस्ताव आकर्षक था। आरोपियों ने खुद को बैंकिंग प्रक्रिया में दक्ष बताते हुए भरोसा दिलाया कि लोन जल्द ही पास हो जाएगा और किसी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी।
प्रक्रिया के नाम पर ली गई रकम
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने लोन प्रक्रिया शुरू करने के नाम पर अलग-अलग मदों—जैसे प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज और अन्य औपचारिकताओं—का हवाला देते हुए पीड़ित से पैसे मांगे। धीरे-धीरे उन्होंने कुल ₹3.55 लाख की रकम हासिल कर ली।
इस दौरान आरोपियों ने लगातार यह भरोसा दिलाया कि लोन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी। इसी आश्वासन के चलते पीड़ित ने भुगतान जारी रखा।
बैंक पहुंचने पर खुला सच
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी लोन स्वीकृत नहीं हुआ, तो पीड़ित को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने सीधे संबंधित बैंक शाखा में जाकर जानकारी ली। वहां उन्हें पता चला कि जिस लोन की बात की जा रही थी, उसके लिए कोई आधिकारिक आवेदन ही दर्ज नहीं किया गया है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले बैंक से जुड़े रहे हैं, लेकिन वर्तमान में उनका बैंक से कोई संबंध नहीं है। यह जानकारी मिलते ही पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
मामला दर्ज, जांच शुरू
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने थाना बारादरी में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने किस तरह से पीड़ित का विश्वास जीता और क्या उन्होंने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है। बैंकिंग लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
पूर्व अनुभव का किया दुरुपयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में आरोपी अपने पुराने पेशेवर अनुभव का दुरुपयोग करते हैं। बैंकिंग प्रक्रिया की जानकारी होने के कारण वे पीड़ितों को तकनीकी शब्दों और प्रक्रियाओं में उलझाकर भरोसा दिला देते हैं।
यही वजह है कि ऐसे मामलों में लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं, खासकर जब उन्हें बड़े लोन या तेज मंजूरी का वादा किया जाता है।
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लोन फ्रॉड के बढ़ते मामले
हाल के समय में लोन दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। फर्जी एजेंट या बिचौलिए खुद को बैंक से जुड़ा बताकर लोगों को फंसाते हैं और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठ लेते हैं।
कई मामलों में लोन की कोई वास्तविक प्रक्रिया शुरू ही नहीं की जाती, बल्कि पूरा खेल केवल पैसा ठगने के लिए रचा जाता है।
सावधानी बेहद जरूरी
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी लोन प्रक्रिया के लिए सीधे बैंक या अधिकृत चैनल से ही संपर्क किया जाए। किसी भी व्यक्ति या एजेंट के कहने पर बिना पुष्टि के पैसे देना जोखिम भरा हो सकता है।
लोन से संबंधित किसी भी भुगतान से पहले बैंक की आधिकारिक जानकारी लेना और दस्तावेजों की सत्यता जांचना जरूरी है। साथ ही, किसी भी तरह के “गारंटीड लोन” या “तुरंत स्वीकृति” जैसे दावों से सतर्क रहना चाहिए।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल, मामले की जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका को विस्तार से खंगाला जा रहा है। पीड़ित को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी रकम की भरपाई हो सकेगी।
यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि वित्तीय मामलों में सतर्कता और सत्यापन बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान में बदल सकती है।
