‘जी गामा एक्सचेंज’ मास्टर आईडी से बनती थीं यूजर प्रोफाइल; यूपी–दिल्ली में घूमकर ऑनलाइन सट्टा संचालित, रजिस्टर और गैजेट्स बरामद

“ऐप से चलता था सट्टे का नेटवर्क: जीजा-साले समेत पांच गिरफ्तार, कार में घूमकर लगवाते थे IPL पर दांव”

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By Roopa
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कानपुर। आईपीएल के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें ऐप के जरिए देश के अलग-अलग शहरों में घूम-घूमकर दांव लगवाया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों—अभिषेक जैन, सौरभ गुप्ता, अनन्य वत्स, अभिषेक मित्तल और शुभम विजय—को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सट्टे के लेन-देन से जुड़ा रजिस्टर बरामद किया गया है।

कार से घूम-घूमकर चलता था सट्टा नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि आरोपी यूपी, दिल्ली और एनसीआर के विभिन्न शहरों में कार से घूमकर ऑनलाइन सट्टा लगवाते थे, ताकि किसी एक स्थान पर पकड़े जाने का जोखिम कम रहे। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक काली स्कॉर्पियो में बैठे कुछ लोग दादानगर क्षेत्र के पास सट्टा ऑपरेट कर रहे हैं। इसके बाद छापेमारी कर सभी पांच आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में अभिषेक जैन और उसका साला सौरभ गुप्ता मुख्य भूमिका में बताए जा रहे हैं, जिन्होंने मिलकर इस नेटवर्क को संचालित किया। अन्य आरोपी अनन्य वत्स, अभिषेक मित्तल और शुभम विजय इस नेटवर्क में सहयोगी के रूप में काम कर रहे थे।

‘जी गामा एक्सचेंज’ से बनती थीं आईडी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ‘जी गामा एक्सचेंज’ नाम की मास्टर आईडी का इस्तेमाल करते थे। इसी आईडी के जरिए वे नई यूजर आईडी और पासवर्ड जनरेट कर सट्टेबाजों को उपलब्ध कराते थे।

खिलाड़ी पहले पैसे जमा करते थे, जिसके बदले उन्हें वर्चुअल क्वाइन दिए जाते थे। इसके बाद वे मैच के दौरान बदलते भाव के आधार पर दांव लगाते थे। जीतने पर भुगतान ऑनलाइन और नकद दोनों माध्यमों से किया जाता था।

रजिस्टर में मिला करोड़ों का हिसाब-किताब

आरोपियों के पास से बरामद रजिस्टर में सट्टे से जुड़े लेन-देन का विस्तृत विवरण मिला है। इसमें कई लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और जमा-निकासी की रकम दर्ज है। पुलिस अब इस रजिस्टर के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और कई शहरों में फैला हुआ था। पुलिस को आशंका है कि इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

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पढ़े-लिखे और कारोबारी निकले आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों की पृष्ठभूमि ने भी इस मामले को और चौंकाने वाला बना दिया है। अभिषेक जैन एमकॉम करने के बाद लोहे का कारोबार करता है, जबकि उसका साला सौरभ गुप्ता मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के बाद मेडिकल स्टोर चला रहा था।

वहीं, अभिषेक मित्तल एमबीए करने के बाद टायर-ट्यूब के कारोबार से जुड़ा था। अनन्य वत्स डीएलएड का छात्र है, जबकि शुभम विजय डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करता था। इसके बावजूद सभी आरोपी जल्दी पैसा कमाने के लालच में इस अवैध गतिविधि में शामिल हो गए।

गिरफ्तारी के बाद फूट-फूटकर रोए आरोपी

पुलिस के सामने पेश किए जाने के दौरान सभी पांचों आरोपी भावुक हो गए और अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोबारा ऐसा न करने की बात कही। उन्होंने माना कि अच्छी शिक्षा और रोजगार होने के बावजूद वे लालच में आकर सट्टेबाजी के इस नेटवर्क में शामिल हो गए।

तकनीक के सहारे फैल रहा सट्टा कारोबार

यह मामला दिखाता है कि कैसे तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध सट्टेबाजी को नए स्तर पर पहुंचाया जा रहा है। मोबाइल ऐप, वर्चुअल करेंसी और डिजिटल पेमेंट के जरिए यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और ट्रैक करना मुश्किल होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संगठित गिरोह तकनीकी प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर युवाओं और आम लोगों को आकर्षित करते हैं।

आगे की कार्रवाई जारी

फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। रजिस्टर में मिले डेटा के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

यह कार्रवाई एक बार फिर इस बात का संकेत देती है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है, जिसमें पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हो रहे हैं। ऐसे में सख्त निगरानी और जागरूकता ही इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने का प्रभावी उपाय हो सकता है।

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