बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षिका को मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए मिले युवक ने खुद को पुलिस सब-इंस्पेक्टर बताकर ₹22.5 लाख की ठगी कर ली। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पहले भरोसा जीता, फिर मकान खरीद और व्यवसाय के नाम पर चरणबद्ध तरीके से रकम ऐंठ ली। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।
मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ संपर्क, बना जाल
शिकायत के अनुसार, पीड़िता नेहा गंगवार की मुलाकात जनवरी 2026 में Jeevansathi.com के जरिए आरोपी रितिक काम्बोज से हुई। शुरुआती बातचीत में आरोपी ने खुद को उत्तराखंड में तैनात पुलिस सब-इंस्पेक्टर बताया, जिससे पीड़िता का भरोसा उस पर बढ़ता चला गया।
धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने शादी का प्रस्ताव रखा। 21 फरवरी को दोनों मेरठ के एक होटल में मिले, जहां आरोपी ने शादी का भरोसा दोहराया और अपनी पहचान को विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत किया।
शादी को बनाया ठगी का जरिया
25 फरवरी को आरोपी बरेली पहुंचा और पीड़िता को मकान खरीदने के नाम पर ₹10 लाख देने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद वह उसे गाजियाबाद ले गया, जहां आर्य समाज मंदिर में दोनों की शादी कराई गई।
शादी के बाद आरोपी ने पीड़िता को उसके घर छोड़ दिया, जिससे उसे विश्वास हो गया कि रिश्ता वास्तविक है। लेकिन अगले ही दिन आरोपी ने फिर ₹10 लाख की मांग की, इस बार मकान की रजिस्ट्री का हवाला देते हुए।
बहानों का सिलसिला, रकम की निकासी जारी
पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लगातार नए-नए बहाने बनाकर पैसे मांगता रहा। बाद में उसने अपने रिश्तेदार के पानी के प्लांट के लिए ₹2.5 लाख की जरूरत बताई।
विश्वास में आकर पीड़िता ने अलग-अलग चरणों में कुल ₹22.5 लाख आरोपी को ट्रांसफर कर दिए। यह पूरा लेनदेन बेहद कम समय में हुआ।
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सच्चाई सामने आने पर टूटा भरोसा
रकम लेने के बाद आरोपी ने मिलना-जुलना कम कर दिया और बहाने बनाने लगा। शक होने पर पीड़िता ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच की, जिसमें पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसने अपनी पहचान छिपाकर यह साजिश रची थी।
ठगी का एहसास होने के बाद पीड़िता ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामला दर्ज, आरोपी की तलाश जारी
शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी तलाश की जा रही है। जांच के दौरान पुलिस बैंक ट्रांजक्शन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
संभावना जताई जा रही है कि आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों को भी निशाना बनाया हो सकता है, जिसकी भी जांच की जा रही है।
रिश्तों के जरिए ठगी का बढ़ता ट्रेंड
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला “रिलेशनशिप बेस्ड फ्रॉड” का उदाहरण है, जहां ठग तकनीकी तरीके के बजाय भावनात्मक विश्वास का फायदा उठाते हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, “आजकल ठग मैट्रिमोनियल और सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से भावनात्मक जुड़ाव बनाकर उन्हें निशाना बना रहे हैं। जब भरोसा स्थापित हो जाता है, तो वे आसानी से आर्थिक ठगी को अंजाम देते हैं।”
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में नकली पहचान, झूठे पेशे और योजनाबद्ध मुलाकातों का इस्तेमाल कर विश्वसनीयता बनाई जाती है।
सतर्कता और सत्यापन जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले व्यक्ति की पहचान और पेशे की पूरी जांच-पड़ताल जरूर करनी चाहिए। शुरुआती चरण में किसी भी तरह का बड़ा वित्तीय लेनदेन करने से बचना चाहिए।
किसी भी व्यक्ति पर आंख बंद कर भरोसा करने के बजाय स्वतंत्र रूप से जानकारी सत्यापित करना बेहद जरूरी है।
चेतावनी देती घटना
यह मामला दिखाता है कि कैसे भरोसे और रिश्ते का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। डिजिटल दौर में जहां रिश्ते ऑनलाइन बन रहे हैं, वहीं जोखिम भी तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। अधिकारियों ने भी लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें और बिना जांच के आर्थिक लेनदेन न करें।
