कौशाम्बी पुलिस की कार्रवाई में फर्जी आधार कार्ड, दिल्ली पुलिस का कूटरचित पहचान पत्र, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और मोबाइल बरामद; देश के कई राज्यों में दर्ज मिलीं ऑनलाइन ठगी की शिकायतें

इंस्टाग्राम-व्हाट्सएप पर ‘पैसा डबल’ करने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

कौशाम्बी: उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर साइबर ठगी करने वाले एक अंतरजनपदीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। साइबर क्राइम थाना और मंझनपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान ‘साईवज्र (CyVajra)’ के तहत कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों को निवेश पर दोगुना लाभ का झांसा देकर ठगी करते थे और अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को दूसरे बैंक खातों के जरिए निकालकर अपने कब्जे में ले लेते थे।

पुलिस के अनुसार कार्रवाई की शुरुआत थाना मंझनपुर और पइंसरा क्षेत्र में दर्ज उन शिकायतों के आधार पर हुई, जिनमें पीड़ितों ने साइबर ठगी के बाद अपने बैंक खाते होल्ड होने की जानकारी दी थी। शिकायतों के आधार पर थाना मंझनपुर में दो तथा थाना पइंसरा में एक मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने गिरोह की गतिविधियों का पता लगाया।

संयुक्त पुलिस टीम ने खोरा रोड स्थित मजार के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कौशाम्बी निवासी निखिल सिंह तथा फतेहपुर निवासी आदित्य कुमार और आयुष यादव के रूप में हुई है। जांच के दौरान मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 338, 336(3) और 340(2) भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर लोगों से संपर्क कर कम समय में पैसा दोगुना करने का झांसा देते थे। जब लोग उनके झांसे में आकर रकम भेज देते थे, तो आरोपी उस धन को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद नकदी निकालने या दुकानों पर खरीदारी कर ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से रकम को ठिकाने लगाया जाता था। पुलिस के अनुसार आरोपी पहचान छिपाने के लिए कूटरचित आधार कार्ड का इस्तेमाल करते थे और जरूरत पड़ने पर खुद को स्थानीय निवासी बताकर दुकानदारों या अन्य लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश करते थे।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य अपने पास एक कूटरचित दिल्ली पुलिस पहचान पत्र भी रखते थे, जिससे आवश्यकता पड़ने पर लोगों को भ्रमित किया जा सके। पुलिस का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर लंबे समय से साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर की गई जांच में इस गिरोह के खिलाफ मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों से शिकायतें दर्ज मिलीं। भोपाल, चुरु, कोल्हापुर, नागपुर शहर, नागपुर ग्रामीण तथा ऊधमपुर से दर्ज शिकायतों ने संकेत दिया कि गिरोह की गतिविधियां केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं थीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया गया था। पुलिस अब इन शिकायतों के आधार पर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित कर रही है।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन, चार कूटरचित आधार कार्ड, चार एटीएम कार्ड, दो बैंक पासबुक, ₹1,500 नकद, एक मोटरसाइकिल और एक कूटरचित दिल्ली पुलिस पहचान पत्र बरामद किया गया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कर साइबर ठगी से जुड़े अन्य पीड़ितों, बैंक खातों और संभावित सहयोगियों की पहचान की जा रही है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर कम समय में पैसा दोगुना करने या असामान्य लाभ का दावा करने वाली योजनाएं संगठित साइबर ठगों का सबसे सामान्य हथकंडा हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे किसी भी निवेश प्रस्ताव, लिंक या व्हाट्सएप संदेश पर भरोसा न करें और धन भेजने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। यदि किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की ठगी होती है तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते धनराशि को फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article