गुवाहाटी। असम में चल रही साइबर ठगी की जांच के बीच पुलिस ने गुवाहाटी के हाटीगांव स्थित Majesty Manor में छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में पांच ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो साइबर ठगी के एक पुराने मामले में कथित तौर पर फरार चल रहे थे। जांच के दौरान मिले बयानों, डायरियों और अन्य सामग्रियों से इन लोगों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, नगरबेरा पुलिस की टीम ने बोको-चायगांव क्षेत्र के सीडीएसपी जानकीशोर गोगोई के नेतृत्व में कार्रवाई की। टीम में नगरबेरा थाने के प्रभारी एसआई हरजीत दास और एसआई दिव्यज्योति राजबोंगशी भी शामिल थे। छापेमारी के दौरान छह संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झारखंड के देवघर जिले के सफाकत अंसारी, नगरबेरा थाना क्षेत्र के तुपमारी गांव निवासी आशिक महाबूब आलम, रांगेस्वरी निवासी आर्टफुल इस्लाम, तुपमारी निवासी जाहिदुल इस्लाम, हाटीगांव थाना क्षेत्र के भेटापारा निवासी धुर्बज्योति भुइयां और सोंटोली थाना क्षेत्र के दक्षिण रंगापानी निवासी जोमिर मुल्लाह के रूप में हुई है।
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जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि झारखंड निवासी आरोपी सफाकत अंसारी साइबर ठगी से हासिल रकम लेने के लिए असम आया था। पुलिस के अनुसार, वह स्थानीय हैंडलरों से कथित ठगी की रकम के रूप में नकदी और सोने की वस्तुएं लेने आया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि स्थानीय स्तर पर रकम और अन्य सामान किसके माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था और उसके बाद उसे कहां भेजा जाता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 मोबाइल फोन, आरोपियों और अन्य लोगों के नाम वाले कई एटीएम और डेबिट कार्ड, खरीद की रसीदों के साथ हाल में खरीदी गई सोने की दो अंगूठियां, एक Hyundai i20 कार और एक Pulsar NS400 मोटरसाइकिल बरामद की। इसके अलावा कई पैन कार्ड और आधार कार्ड भी जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों सोने की अंगूठियां छापेमारी से करीब दो दिन पहले खरीदी गई थीं। जांचकर्ता अब इन अंगूठियों की खरीद से जुड़े बिल, भुगतान का माध्यम और संबंधित लेनदेन की जानकारी खंगाल रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सोने की खरीद का कथित साइबर ठगी से हासिल रकम से कोई संबंध था या नहीं।
जांच में डिजिटल संचार के कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, जब्त मोबाइल फोन और पहले से बरामद अन्य सामग्रियों की जांच के दौरान अलग-अलग राज्यों में मौजूद लोगों के साथ चैट, वॉयस मैसेज और अन्य डिजिटल बातचीत सामने आई है। कुछ बातचीत में क्यूआर कोड तथा बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने के संकेत मिले हैं।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, एटीएम और डेबिट कार्ड, क्यूआर कोड, बैंकिंग साधनों तथा पहचान संबंधी दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। जांच का उद्देश्य कथित साइबर ठगी से जुड़े पूरे वित्तीय नेटवर्क का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि किन बैंक खाताधारकों, कार्ड धारकों, स्थानीय हैंडलरों और लाभार्थियों ने नेटवर्क में भूमिका निभाई।
जांचकर्ताओं के सामने सबसे अहम चुनौती रकम के प्रवाह को समझने की है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित ठगी से हासिल धन किस खाते में पहुंचा, किन माध्यमों से आगे स्थानांतरित हुआ और स्थानीय स्तर पर इसे नकदी या सोने जैसी संपत्तियों में बदलने में किन लोगों की भूमिका रही। डिजिटल उपकरणों की जांच से दूसरे राज्यों में सक्रिय कथित सहयोगियों की पहचान होने की उम्मीद है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े संभावित अन्य आरोपियों और स्थानीय हैंडलरों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। जब्त डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और उनकी भूमिका का अंतिम निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
