नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में 1,080 नए मामले दर्ज किए, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक हैं। हालांकि जांच एजेंसी की दोषसिद्धि (कन्विक्शन) दर अब भी बेहद कम बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों के दौरान दर्ज मामलों में केवल 43 मामलों में ही अदालतों से दोषसिद्धि हो सकी, जो कुल मामलों का लगभग 0.93 प्रतिशत है।
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने 30 जून 2026 तक PMLA के तहत 2,444 अभियोजन शिकायतें विशेष अदालतों में दाखिल की हैं। ये सभी मामले फिलहाल सुनवाई के विभिन्न चरणों में हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि एजेंसी ने इस अवधि में 1,243 आरोपियों को PMLA के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। हालांकि, वर्तमान में जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की केंद्रीय स्तर पर अलग से जानकारी उपलब्ध नहीं है क्योंकि कई मामलों में गिरफ्तारी मूल (प्रेडिकेट) अपराध की जांच कर रही अन्य एजेंसियों द्वारा की जाती है।
संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मामलों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वित्त वर्ष 2021-22 में एजेंसी ने 1,116 मामले दर्ज किए थे। इसके बाद 2022-23 में यह संख्या घटकर 953 और 2023-24 में 698 रह गई। हालांकि 2024-25 में मामलों की संख्या फिर बढ़कर 775 हो गई और 2025-26 में यह बढ़कर 1,080 तक पहुंच गई, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। पांच वर्षों में कुल 4,622 मामले दर्ज किए गए।
हालांकि मामलों में वृद्धि के बावजूद दोषसिद्धि की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 से 2025-26 के बीच केवल 43 मामलों में अदालतों ने दोषसिद्धि दर्ज की। इनमें 2021-22 में तीन, 2022-23 में नौ, 2023-24 में 13 तथा 2024-25 और 2025-26 में नौ-नौ मामलों में सजा हुई। इन 43 मामलों में कुल 104 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक 38 आरोपियों को सजा मिली, जबकि 2025-26 और 2023-24 में 19-19 तथा 2022-23 में 24 आरोपियों को दोषी करार दिया गया।
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सरकार ने आयकर विभाग की अभियोजन कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। पिछले पांच वर्षों में आयकर विभाग ने कुल 2,127 अभियोजन मामले दर्ज किए। इनमें 2021-22 में 195, 2022-23 में 387, 2023-24 में 502, 2024-25 में 611 और 2025-26 में 432 मामले शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में अभियोजन मामलों की संख्या पिछले तीन वर्षों की तुलना में कम रही।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम की धारा 279(1) के तहत सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति मिलने और जांच पूरी होने के बाद ही अभियोजन शिकायत दर्ज की जाती है। इसलिए मामलों की संख्या और बाद में होने वाली दोषसिद्धि या बरी होने की घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध नहीं माना जा सकता।
आंकड़ों के अनुसार, आयकर विभाग पिछले पांच वर्षों में केवल 233 मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित कर सका। वहीं इसी अवधि में 854 मामलों में आरोपियों को अदालतों से बरी कर दिया गया। वर्ष 2025-26 में 47 मामलों में दोषसिद्धि हुई, जबकि 293 मामलों में आरोपियों को बरी किया गया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है।
सरकार ने यह भी कहा कि किसी एक वित्त वर्ष में दर्ज अभियोजन मामलों और उसी वर्ष हुई दोषसिद्धि या बरी होने की संख्या की सीधी तुलना उचित नहीं है, क्योंकि अदालतों में लंबित मामलों का निपटारा कई वर्षों बाद होता है। इसलिए किसी वर्ष में दर्ज सजा या बरी होने के आंकड़े अक्सर पूर्व वर्षों में दायर मामलों से संबंधित होते हैं।
संसद में प्रस्तुत आंकड़े यह संकेत देते हैं कि आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय की जांच गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, मामलों की बढ़ती संख्या के साथ न्यायिक प्रक्रिया में समय लगने और सीमित दोषसिद्धि दर जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, जिन पर आगे भी नीति और न्यायिक स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
