रायपुर में Fake Customer Form से Bank Account का Mobile Number बदलकर FD तोड़ने और ₹14.97 लाख निकालने के मामले में आरोपी गिरफ्तार किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, ऑनलाइन ठगी से जुड़े छह आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की द्वारका जिला साइबर सेल ने ऑनलाइन ठगी से जुड़े एक अवैध साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश के इंदौर में की गई, जहां से संचालित इस कथित कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के लोगों को साइबर ठगी का निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से 28 कंप्यूटर, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन तथा बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह कॉल सेंटर किसी बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट का हिस्सा था, जिसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर सेल को ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के बारे में सूचना मिली थी। तकनीकी निगरानी, डिजिटल विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर टीम ने इंदौर स्थित एक परिसर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। छापेमारी के दौरान बरामद कंप्यूटर सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग किन-किन प्रकार की साइबर ठगी में किया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर के कर्मचारी कथित तौर पर विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों से लोगों से संपर्क करते थे और उन्हें अलग-अलग बहानों से अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल निवेश, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाता था। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक ठगी के तरीके और पीड़ितों की संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

जांच एजेंसियां अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से प्राप्त डेटा, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, ईमेल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का उद्देश्य पूरे धन प्रवाह का पता लगाना, गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करना और यह जानना है कि इस नेटवर्क के तार देश के अन्य हिस्सों या विदेशों तक जुड़े हैं या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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इस कार्रवाई के बीच हाल ही में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए महत्वपूर्ण निर्देश भी चर्चा में हैं। शीर्ष अदालत ने पूरे देश में साइबर धोखाधड़ी के मामलों के त्वरित निस्तारण और पीड़ितों को राहत दिलाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को चार सप्ताह के भीतर म्यूल बैंक खातों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थिति रिपोर्ट पर विचार करने के बाद राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर आरएमएस के लिए जारी शिकायत निवारण मॉड्यूल तथा मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर ठगी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी बल दिया है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संगठित साइबर कॉल सेंटर आज साइबर अपराधियों का सबसे प्रभावी हथियार बन चुके हैं। ये गिरोह प्रशिक्षित कॉल एजेंटों, फर्जी पहचान, सोशल इंजीनियरिंग और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अनजान कॉल, निवेश प्रस्ताव, बैंकिंग सत्यापन, केवाईसी अपडेट या डिजिटल भुगतान संबंधी निर्देश पर बिना पुष्टि किए कार्रवाई न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग करें। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच लगातार जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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