नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह नए सुरक्षा ढांचे के तहत पुनर्गठित किया गया है। सरकार ने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परिणाम घोषित होने तक हर चरण के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है। साथ ही, भविष्य में NEET को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा कि मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा की गई और ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है जिससे भविष्य में प्रश्नपत्र लीक या अन्य गड़बड़ियों की आशंका को न्यूनतम किया जा सके।
हलफनामे के अनुसार, फिलहाल NEET देशभर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और सभी क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित किया जाता है। हालांकि सरकार कंप्यूटर आधारित परीक्षा लागू करने के विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) की तर्ज पर दो चरणों वाली परीक्षा प्रणाली का मॉडल भी शामिल है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों, सभी संबंधित पक्षों से परामर्श और अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय देने के बाद ही लिया जाएगा।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि परीक्षा सुधारों के तहत दो महत्वपूर्ण कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। पहला, पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन अधिनियम, 2026 लागू किया गया है, जिसके तहत पेपर लीक, अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा दिलाना, कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ और अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी की गई है।
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दूसरे कदम के रूप में सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व UIDAI अध्यक्ष नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। इस समिति में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व खुफिया ब्यूरो निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल तथा पूर्व बिहार मुख्य सचिव अमित लाल मीणा सहित कई विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति को NTA की पूरी परीक्षा प्रणाली की समीक्षा कर तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देने का दायित्व सौंपा गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि विशेषज्ञ समिति की देखरेख में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण और परिणाम तक की पूरी प्रक्रिया के लिए नई सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है। प्रश्नपत्र अत्यधिक सुरक्षित स्थान पर विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाते हैं, जहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। आवश्यक प्रश्नों की तुलना में कम से कम पांच गुना बड़ा प्रश्न बैंक तैयार किया जाता है और अंतिम प्रश्नपत्र ऐसी प्रक्रिया से चुना जाता है जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरा प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं होता।
सरकार के अनुसार, प्रश्नपत्रों का 13 भाषाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से अनुवाद किया जाता है। विभिन्न सेटों की समानांतर छपाई, पैकिंग और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी तरह की आशंका होने पर तुरंत दूसरा सेट उपयोग में लाया जा सके। प्रत्येक पैकेट पर विशिष्ट क्यूआर कोड लगाया जाता है और उन्हें जीपीएस युक्त स्टील ट्रंक में वन-टाइम लॉक के साथ सुरक्षित रखा जाता है। परीक्षा के दिन अधिकृत अधिकारी अंतिम प्रश्नपत्र सेट का चयन करते हैं और CAPF, कार्यपालक मजिस्ट्रेट तथा राज्य पुलिस की निगरानी में उसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
हलफनामे में कहा गया है कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का प्रवेश फिंगरप्रिंट, फेस रिकग्निशन और पहचान सत्यापन के बाद ही होगा। तलाशी के लिए हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर का भी उपयोग किया जाएगा। परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रत्येक अभ्यर्थी की OMR शीट की दो अलग-अलग प्रतियां तैयार कर स्वतंत्र रूप से सीलबंद किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो सके।
सुप्रीम कोर्ट फिलहाल NTA में संस्थागत सुधारों से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों और उनके परिवारों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर कायम रह सके।
