मथुरा के कोसी कलां में ज्वेलरी शॉप से करीब ₹14 करोड़ का सोना और ₹14 लाख नकद चोरी होने के मामले की पुलिस जांच कर रही है।

फर्जी सोने पर ₹1.5 करोड़ का गोल्ड लोन घोटाला: निजी बैंक का मूल्यांकनकर्ता समेत तीन गिरफ्तार, ऑडिट में खुली धोखाधड़ी की परतें

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक निजी बैंक को लगभग ₹1.5 करोड़ का चूना लगाने वाले कथित गोल्ड लोन घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने बैंक के एक मूल्यांकनकर्ता (Appraiser) सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है। आरोप है कि गिरोह ने नकली आभूषणों को असली सोना बताकर फर्जी बैंक खातों के माध्यम से गोल्ड लोन स्वीकृत कराए और बैंक से बड़ी रकम निकाल ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस तरीके से करीब 15 फर्जी खातों का उपयोग कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई।

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी ने अपने एक सहयोगी और बैंक के मूल्यांकनकर्ता के साथ मिलकर पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया। आरोप है कि गिरोह ऐसे लोगों को धन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। उन्हें यह भरोसा दिलाया जाता था कि उनके आभूषण बैंक में गिरवी रखकर ऋण लिया जाएगा और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

जांच में सामने आया कि बैंक का मूल्यांकनकर्ता, जिसकी जिम्मेदारी गिरवी रखे गए सोने की जांच और गुणवत्ता प्रमाणित करने की थी, ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नकली आभूषणों को असली सोना प्रमाणित कर दिया। उसके मूल्यांकन के आधार पर बैंक ने गोल्ड लोन स्वीकृत कर दिए। इसके बाद आरोपी ऋण की राशि निकालकर फरार हो जाते थे। पुलिस का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में मूल्यांकनकर्ता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उसी के प्रमाणन के बिना ऋण स्वीकृत होना संभव नहीं था।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह ने लगभग 15 फर्जी खातों के माध्यम से करीब ₹1.5 करोड़ का गोल्ड लोन हासिल किया। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि बैंक का मूल्यांकनकर्ता प्रत्येक ₹10 लाख के स्वीकृत ऋण पर लगभग ₹2.5 लाख कमीशन के रूप में प्राप्त करता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस धोखाधड़ी में अन्य बैंक कर्मियों या बाहरी व्यक्तियों की भी कोई भूमिका थी या नहीं।

धोखाधड़ी का खुलासा बैंक के नियमित आंतरिक ऑडिट के दौरान हुआ। ऑडिट में गिरवी रखे गए आभूषणों और संबंधित ऋण खातों में कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद बैंक ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके आधार पर विस्तृत जांच शुरू की गई।

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इसी दौरान मुख्य आरोपी ने एक कारोबारी, जगदीश एस., को भी कथित रूप से अपने झांसे में लिया। आरोपी ने अपने एक परिचित के माध्यम से कारोबारी से संपर्क कर दावा किया कि बैंक में गिरवी रखा गया सोना जल्द नीलाम होने वाला है। उसने कारोबारी को ₹9,000 प्रति ग्राम की दर से सोना दिलाने का प्रस्ताव दिया और भरोसा दिलाया कि बाद में उसे ₹13,000 प्रति ग्राम तक बेचकर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

पुलिस के अनुसार, इस झांसे में आकर कारोबारी ने आरोपी को ₹1.53 करोड़ दे दिए। आरोप है कि आरोपी ने यह राशि बैंक में जमा कर अपने खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई से बचने का प्रयास किया और बाद में फरार हो गया। जब कारोबारी को तय समय पर सोना नहीं मिला और संपर्क भी टूट गया, तब उसने 28 जुलाई को पीण्या पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी को कर्नाटक के कारवार क्षेत्र में उनके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर बैंक के मूल्यांकनकर्ता को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि फर्जी खातों की वास्तविक संख्या कितनी है, धोखाधड़ी की कुल राशि कितनी हो सकती है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

जांच एजेंसियों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली में आंतरिक नियंत्रण और मूल्यांकन प्रक्रिया का दुरुपयोग कर इस प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। पुलिस बैंक के रिकॉर्ड, ऋण स्वीकृति दस्तावेज, खातों के लेनदेन और आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

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