एडमिन एक्सेस का दुरुपयोग कर कंपनी की भुगतान प्रणाली में की गई कथित हेराफेरी; ₹61.44 लाख फ्रीज, लैपटॉप और तीन मोबाइल जब्त

ई-प्रोक्योरमेंट कंपनी से ₹1.56 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, तीन महीने बाद सूरत से दबोचा गया आरोपी

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By Roopa
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अहमदाबाद: अहमदाबाद पुलिस ने एक निजी ई-प्रोक्योरमेंट टेक्नोलॉजी कंपनी से ₹1.56 करोड़ की कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले में मुख्य आरोपी निखिल राजेशभाई खलास (37) को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले लगभग तीन महीने से फरार चल रहा था और लगातार अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था। आखिरकार एलिसब्रिज पुलिस और स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) जोन-7 की संयुक्त कार्रवाई में उसे सूरत के कतारगाम क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, निखिल खलास कंपनी के बिडिंग डिवीजन में सपोर्ट एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत था। जांच में आरोप है कि उसने अपने प्रशासनिक (एडमिन) अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए कंपनी की ऑनलाइन भुगतान प्रणाली में हेरफेर की। जिन भुगतान को वास्तविक बोलीदाताओं के बैंक खातों में जाना था, उनकी जगह आरोपी ने कथित तौर पर अपने और अपने एक सहयोगी के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी। इस तरीके से कंपनी के ₹1.56 करोड़ से अधिक की राशि का गबन किए जाने का आरोप है।

मामले का खुलासा होने के बाद 19 मई 2026 को एलिसब्रिज पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की आपराधिक न्यासभंग, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। जांच का नेतृत्व एलिसब्रिज पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया और अपनी लोकेशन लगातार बदलता रहा। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और गुजरात के विभिन्न शहरों में आवाजाही की। इस दौरान उसने अपनी डिजिटल गतिविधियों को भी छिपाने का प्रयास किया ताकि जांच एजेंसियां उसके ठिकाने तक न पहुंच सकें।

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पुलिस को तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल इंटेलिजेंस के जरिए सूचना मिली कि आरोपी सूरत के कतारगाम इलाके में छिपा हुआ है। इसके बाद एलसीबी जोन-7 की टीम ने स्थानीय निगरानी शुरू की और पर्याप्त पुष्टि होने पर एलिसब्रिज पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक डेल लैपटॉप बरामद किया। जब्त किए गए इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹28,000 बताई गई है। अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धोखाधड़ी की योजना कैसे बनाई गई, भुगतान प्रणाली में किस प्रकार बदलाव किए गए और क्या इस अपराध में अन्य लोग भी शामिल थे।

पुलिस ने जांच के दौरान कथित रूप से गबन की गई रकम का डिजिटल ट्रेल भी तलाश लिया है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक ₹61.44 लाख की राशि को फ्रीज किया जा चुका है, जिसे इस कथित धोखाधड़ी से जुड़ा माना जा रहा है। शेष राशि की बरामदगी, धन के अंतिम गंतव्य का पता लगाने और संभावित सह-साजिशकर्ताओं की पहचान के लिए पुलिस आरोपी की रिमांड लेने की तैयारी कर रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संस्थानों के भीतर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाली विशेष डिजिटल पहुंच (प्रिविलेज्ड एक्सेस) का दुरुपयोग आज कॉरपोरेट साइबर अपराधों का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को भुगतान प्रणालियों में मल्टी-लेवल ऑथराइजेशन, नियमित ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग, रोल-बेस्ड एक्सेस कंट्रोल और संदिग्ध गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी जैसी मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्थाएं अपनानी चाहिए। साथ ही संवेदनशील वित्तीय प्रणालियों तक पहुंच रखने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों पर निरंतर निगरानी और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट भी आवश्यक है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आगे और खुलासे होने की संभावना है।

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