UIDAI आधार प्रमाणीकरण में AI, चेहरे की पहचान और जीवंतता जांच का इस्तेमाल कर फर्जी पहचान रोकने की व्यवस्था मजबूत कर रहा है।

आधार में फर्जीवाड़े पर AI का पहरा, UIDAI रोजाना 10 करोड़ प्रमाणीकरण संभाल रहा; 30 करोड़ तक क्षमता बढ़ाने की तैयारी

Team The420
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नई दिल्ली। आधार आधारित पहचान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। UIDAI के अध्यक्ष नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि डिजिटल पहचान और प्रमाणीकरण के क्षेत्र में फर्जीवाड़ा करने वाले लगातार अपनी तकनीक बेहतर कर रहे हैं, इसलिए पहचान प्रणाली को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने इसे धोखाधड़ी करने वालों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच लगातार चलने वाली ‘बिल्ली और चूहे’ की दौड़ बताया।

मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के एक सत्र में मिश्रा ने कहा कि UIDAI लंबे समय से पहचान सत्यापन में ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जो नकली या कृत्रिम पहचान के प्रयासों को पकड़ने में मदद करती हैं। उन्होंने बताया कि चेहरे और अंगुलियों के निशान की जांच में जीवंतता परीक्षण पहले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रमाणीकरण के दौरान सामने मौजूद व्यक्ति वास्तविक है, न कि किसी तस्वीर, वीडियो, कृत्रिम माध्यम या अन्य तरीके से पहचान प्रणाली को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

रोजाना 10 करोड़ आधार प्रमाणीकरण

मिश्रा के मुताबिक आधार प्रमाणीकरण का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने UIDAI की वार्षिक रिपोर्ट के लिए शुरुआती टिप्पणियां लिखी थीं, तब रोजाना करीब सात करोड़ प्रमाणीकरण होते थे। अब यह संख्या बढ़कर लगभग 10 करोड़ प्रतिदिन पहुंच चुकी है। बढ़ती मांग को देखते हुए UIDAI अपने बुनियादी ढांचे को भविष्य में रोजाना 25 से 30 करोड़ आधार प्रमाणीकरण संभालने के लिए तैयार कर रहा है।

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आधार का इस्तेमाल बैंकिंग, दूरसंचार और अन्य डिजिटल सेवाओं में पहचान स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। UIDAI के अनुसार 600 से अधिक संस्थाएं अब आधार का उपयोग कर रही हैं। ऐसे में प्रमाणीकरण व्यवस्था की सुरक्षा और उसकी क्षमता दोनों महत्वपूर्ण हो गई हैं। बड़ी संख्या में होने वाले प्रमाणीकरण के बीच किसी फर्जी पहचान को स्वीकार करना वित्तीय धोखाधड़ी और पहचान चोरी जैसे मामलों का कारण बन सकता है।

चेहरे की पहचान को ऐप में सीधे जोड़ने की सुविधा

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान UIDAI ने Aadhaar Face Authentication SDK और Face Authentication Sandbox भी शुरू किया। SDK के जरिए बैंक, सरकारी विभाग, फिनटेक कंपनियां और अन्य संस्थाएं आधार की चेहरे से पहचान सत्यापन सुविधा को अपने Android और iOS अनुप्रयोगों में सीधे जोड़ सकेंगी। इससे उपयोगकर्ता को पहचान सत्यापन के लिए अलग अनुप्रयोग में जाने की जरूरत नहीं होगी।

नई व्यवस्था में AI और मशीन लर्निंग आधारित जीवंतता जांच तथा फर्जी पहचान से बचाव की तकनीक शामिल है। प्रमाणीकरण से जुड़े आंकड़ों की सुरक्षित प्रक्रिया और कूटबद्ध सुरक्षा को भी इसका हिस्सा बनाया गया है। इसका मकसद डिजिटल खाते खोलने, ग्राहक पहचान सत्यापन और अन्य सेवाओं में पहचान प्रक्रिया को अधिक सहज और सुरक्षित बनाना है।

परीक्षण के लिए अलग सुरक्षित वातावरण

Face Authentication Sandbox संस्थाओं और विकास टीमों को वास्तविक सेवा शुरू करने से पहले पूरी प्रक्रिया का परीक्षण करने की सुविधा देगा। इसमें उपयोगकर्ता की सहमति, चेहरा दर्ज करना, जीवंतता जांच, प्रमाणीकरण, त्रुटि प्रबंधन और परिणाम सत्यापन जैसे चरणों को जांचा जा सकेगा। नेटवर्क बाधित होने, समय समाप्त होने, गलत डिजिटल हस्ताक्षर और फर्जी पहचान के प्रयास जैसी परिस्थितियों का भी परीक्षण किया जा सकता है।

मिश्रा ने आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘एजेंटिक’ सेवाओं के बढ़ने की संभावना भी जताई। उनके मुताबिक भविष्य में लोग स्वयं प्रमाणीकरण करने के बजाय AI एजेंट को कुछ प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी दे सकते हैं। इससे पहचान सत्यापन के नए इस्तेमाल सामने आ सकते हैं, लेकिन साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी होंगी।

UIDAI का जोर अब केवल प्रमाणीकरण की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के साथ उसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा बनाए रखने पर है। AI आधारित निगरानी, जीवंतता जांच और चेहरे से प्रमाणीकरण जैसी तकनीकों का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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