दिल्ली हाईकोर्ट ने विमल इलायची विज्ञापन मामले में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र FDA द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ निर्माता कंपनी की याचिका खारिज कर दी।

विमल इलायची मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शाहरुख-अजय-टाइगर को भेजे नोटिस पर याचिका खारिज

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली। विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्माता कंपनी की याचिका खारिज कर दी है। कंपनी ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। अदालत ने कहा कि नोटिस से जुड़ी कथित गतिविधियां और नियामकीय कार्रवाई महाराष्ट्र में हुई हैं, इसलिए इस मामले में महाराष्ट्र की अदालतें उचित मंच हैं।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह स्थापित नहीं कर पाया कि कार्रवाई का कोई महत्वपूर्ण या ठोस हिस्सा दिल्ली हाईकोर्ट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में हुआ था। अदालत ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर याचिका को विचार योग्य नहीं माना। हालांकि, अदालत ने नोटिस को कानूनी रूप से सही या गलत होने के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित कारण बताओ नोटिस महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मुंबई कार्यालय की ओर से जारी किए गए थे। ये नोटिस कंपनी द्वारा नियुक्त ब्रांड एंबेसडरों को भेजे गए थे, जो मुंबई में रहते हैं। नोटिस में महाराष्ट्र में कथित गतिविधियों और वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों का उल्लेख था।

FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals

याचिकाकर्ता कंपनी ने अपनी याचिका में कहा था कि वह अपने विमल ब्रांड के तहत इलायची उत्पाद के प्रचार के लिए चर्चित फिल्म कलाकारों की सेवाएं लेती है। कंपनी के अनुसार, कलाकारों के साथ हुए समझौते में यह प्रावधान भी था कि उनके विज्ञापन लागू कानूनों के अनुरूप होंगे।

कंपनी ने दावा किया कि महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भेजे नोटिस में विमल इलायची के विज्ञापनों को कथित तौर पर विमल पान मसाला के सरोगेट विज्ञापन के रूप में देखा है। याचिका के मुताबिक, संबंधित पान मसाला उत्पाद राज्य में प्रतिबंधित है।

नोटिस में तीनों कलाकारों से ऐसे दस्तावेज पेश करने को कहा गया था, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि जिस उत्पाद का वे प्रचार कर रहे हैं, वह राज्य में प्रतिबंधित उत्पाद से अलग है। साथ ही प्रचार अभियान रोकने और डिजिटल मंचों पर उपलब्ध संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश भी दिए गए थे।

कंपनी की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि 11 अगस्त को जारी नोटिस केवल ब्रांड एंबेसडरों को भेजे गए, जबकि किसी भी कार्रवाई का आर्थिक प्रभाव कंपनी पर पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि उसका कारोबार दिल्ली से संचालित होता है और ब्रांड एंबेसडरों से जुड़े कुछ पहलू दिल्ली से संबंधित हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि केवल दिल्ली से कारोबार संचालित करने या ब्रांड एंबेसडरों से जुड़ी गतिविधियों का दिल्ली से संबंध होने के आधार पर महाराष्ट्र में जारी नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने का अधिकार क्षेत्र स्वतः पैदा नहीं हो जाता।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिका में केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई विशेष राहत नहीं मांगी गई। न ही इन प्राधिकरणों की ओर से जारी किसी आदेश या निर्देश को चुनौती दी गई थी।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पंजीकृत कार्यालय का दिल्ली में होना, भुगतान किए जाने की जगह या विज्ञापन अभियान के किसी हिस्से का दिल्ली से जुड़ा होना अपने आप में अदालत का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र स्थापित नहीं करता। अदालत ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से संबंधित न्यायिक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि किसी मामले की सुनवाई के लिए उपयुक्त मंच का निर्धारण वास्तविक कार्रवाई और विवाद से जुड़े स्थान के आधार पर किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के आधार पर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नोटिस में लगाए गए आरोपों या कंपनी की चुनौती के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। लंबित आवेदन भी इसी के साथ निस्तारित कर दिए गए।

हमसे जुड़ें

Share This Article