नई दिल्ली। कंपनी की निवेश योजनाओं में रकम लगाने पर 25 महीने तक 10 फीसदी से अधिक मासिक रिटर्न देने का झांसा देकर 21 निवेशकों से ₹3.78 करोड़ से ज्यादा की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा ने मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए शुरुआत में उन्हें रिटर्न दिया गया, लेकिन बड़ी रकम जमा होने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया। निवेशकों को न तो वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई।
आर्थिक अपराध शाखा में की गई शिकायत के अनुसार, निवेशकों को संबंधित कंपनी की विभिन्न योजनाओं में ऑनलाइन रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया था। उन्हें बताया गया कि निवेश पर हर महीने 10 फीसदी से अधिक रिटर्न मिलेगा और यह भुगतान करीब 25 महीने तक जारी रहेगा। अधिक मुनाफे के इस वादे पर भरोसा कर 21 निवेशकों ने अलग-अलग समय पर कुल ₹3.78 करोड़ से अधिक की रकम निवेश कर दी।
जांच के मुताबिक, शुरुआत में निवेशकों को कुछ रिटर्न का भुगतान किया गया। इससे उन्हें योजना और कंपनी की विश्वसनीयता पर भरोसा हो गया। इसके बाद निवेशकों को मिलने वाला रिटर्न दोबारा निवेश करने के लिए कहा गया। साथ ही उनसे अपने परिचितों और अन्य लोगों को भी निवेश योजना से जोड़ने के लिए कहा गया। इस तरह निवेशकों की संख्या और जमा रकम लगातार बढ़ती गई।
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शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पर्याप्त रकम जमा होने के बाद भुगतान अचानक रोक दिया गया। जब निवेशकों ने अपनी मूल रकम और तय रिटर्न की मांग की तो उन्हें कथित तौर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद भुगतान नहीं किया गया और आरोपी पक्ष से जुड़े लोग भी संपर्क से दूर हो गए। रकम वापस नहीं मिलने पर निवेशकों ने आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत की।
प्रारंभिक जांच में पुलिस ने निवेशकों से रकम जुटाने के तरीके, कंपनी से जुड़े लेनदेन और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि निवेशकों को विभिन्न योजनाओं में पैसा लगाने के लिए कथित तौर पर योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था। शुरुआत में रिटर्न देकर उनका भरोसा हासिल किया गया और बाद में उन्हें ज्यादा रकम लगाने तथा नए निवेशक लाने के लिए प्रेरित किया गया।
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की थी। अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी मूल रूप से कानपुर का रहने वाला है और उसने कानून की पढ़ाई की है। वह पिछले करीब छह वर्षों से संबंधित कंपनी से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कंपनी की योजनाओं के जरिए कुल कितने निवेशकों से रकम जुटाई गई और कुल वित्तीय लेनदेन कितना हुआ।
पुलिस संबंधित बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। इसके जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी की रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई या उसे अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया। मामले में सामने आने वाले अन्य आरोपियों और उनकी भूमिका के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
