रायसेन में किसानों की जानकारी के बिना जमीन रिकॉर्ड का कथित इस्तेमाल कर सस्ती मूंग को MSP पर सरकारी खरीद केंद्रों में बेचने के मामले की जांच चल रही है।

खेत किसी और का, मूंग किसी और की; फर्जी पंजीयन से एमएसपी पर करोड़ों का खेल करने की तैयारी

Team The420
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भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीद व्यवस्था में किसानों के जमीन रिकॉर्ड का कथित दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। रायसेन जिले में आर्थिक अपराध शाखा की जांच में आरोप है कि ऐसे किसानों की जमीन का इस्तेमाल सरकारी समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए किया गया, जिन्होंने इसके लिए पंजीयन ही नहीं कराया था। जमीन के रिकॉर्ड में आरोपियों या उनके परिचितों को सिकमीदार या खेती करने वाले के तौर पर दर्ज कराकर फर्जी पंजीयन कराया गया और फिर बाजार से बेहद कम कीमत पर खरीदी गई मूंग को सरकारी खरीद केंद्रों पर एमएसपी के आसपास की दर पर बेच दिया गया।

जांच के मुताबिक, खरीद केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल कर उन किसानों की पहचान की गई, जिन्होंने सरकारी खरीद के लिए पंजीयन नहीं कराया था। आरोप है कि इसके बाद उनकी जमीन से संबंधित रिकॉर्ड में दूसरे लोगों के नाम दर्ज कराए गए। इन पंजीयनों के आधार पर मूंग की सरकारी खरीद कराई गई, जबकि वास्तविक जमीन मालिकों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।

न पट्टा दिया, न सहमति, फिर भी हो गया पंजीयन

जांच के दौरान संबंधित किसानों से पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि उन्होंने अपनी जमीन किसी आरोपी या अन्य व्यक्ति को खेती के लिए पट्टे पर नहीं दी थी। किसानों ने ऐसे किसी पंजीयन के लिए सहमति देने से भी इनकार किया। उनका कहना था कि सरकारी खरीद से जुड़े इन लेनदेन में उन्हें कोई रकम नहीं मिली।

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जांच में ऐसे कई मामले सामने आने का दावा किया गया है। एक मामले में करीब 1.5 एकड़ जमीन एक किसान के बजाय दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज की गई और उसी पंजीयन के आधार पर मूंग की बिक्री की गई। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित किसान ने अपनी जमीन के दूसरे हिस्सों का सरकारी खरीद के लिए खुद पंजीयन कराया था। इससे एक ही किसान की जमीन के अलग-अलग हिस्सों के पंजीयन में अंतर सामने आया।

एक अन्य मामले में किसान की पत्नी और बहू की करीब 2.5 एकड़ जमीन के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग लोगों के नाम पर दर्ज किए जाने का आरोप है। इसी तरह एक अन्य किसान की पत्नी के नाम दर्ज करीब 1.75 एकड़ जमीन का भी कथित तौर पर फर्जी पंजीयन के जरिए सरकारी खरीद में इस्तेमाल किया गया। इन पंजीयनों के साथ दर्ज बैंक खातों की जांच में भी कथित अनियमितताएं मिलीं। कई बैंक खाते वास्तविक जमीन मालिकों के नाम पर नहीं पाए गए।

₹3,000 से कम की मूंग, सरकारी केंद्र पर ₹8,500 से ज्यादा

जांच में सामने आया कथित तरीका सरकारी खरीद व्यवस्था को सीधे आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला था। आरोप है कि फर्जी पंजीयनों के आधार पर सरकारी केंद्रों पर बेची गई मूंग संबंधित किसानों के खेतों में पैदा हुई ही नहीं थी। आरोपियों ने खुले बाजार, व्यापारियों और बरेली मंडी से मूंग ₹3,000 प्रति क्विंटल से कम कीमत पर खरीदी और उसे सरकारी खरीद केंद्रों पर एमएसपी पर बेच दिया।

मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्ष 2024-25 में ₹8,558 प्रति क्विंटल और वर्ष 2025-26 में ₹8,682 प्रति क्विंटल था। यानी बाजार से खरीद और सरकारी खरीद मूल्य के बीच प्रति क्विंटल करीब ₹5,500 या उससे अधिक का अंतर था। आरोप है कि इसी बड़े अंतर का फायदा उठाकर सस्ती मूंग को किसानों की जमीन के नाम पर सरकारी खरीद में खपाया गया।

₹4.54 लाख की खरीद, सरकार से मिले ₹13.15 लाख

जांच में तीन मामलों में कथित अनुचित लाभ का प्रारंभिक आकलन किया गया है। एक आरोपी ने दो पंजीयनों के माध्यम से करीब 12.62 हेक्टेयर जमीन अपने नाम दर्ज कराई। इन पंजीयनों के आधार पर 151.524 क्विंटल मूंग सरकारी खरीद केंद्रों पर बेची गई।

जांच के अनुसार, इस मूंग को खरीदने में करीब ₹4.54 लाख खर्च किए गए, जबकि सरकारी खरीद से लगभग ₹13.15 लाख प्राप्त हुए। इस तरह करीब ₹8.61 लाख के अनुचित लाभ का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम वास्तविक कृषि उत्पादन के बजाय बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर सरकारी खरीद प्रणाली के जरिए प्राप्त की गई।

दूसरे मामले में करीब 3.52 हेक्टेयर जमीन से जुड़े पंजीयन के आधार पर 42.276 क्विंटल मूंग बेची गई। इससे लगभग ₹3.67 लाख की रकम प्राप्त हुई और करीब ₹2.40 लाख के अनुचित लाभ का अनुमान है।

तीसरे मामले में करीब 3.43 हेक्टेयर जमीन से जुड़े पंजीयन पर 41.136 क्विंटल मूंग बेची गई। इससे लगभग ₹3.57 लाख प्राप्त हुए और जांच में करीब ₹2.34 लाख के अनुचित लाभ का आकलन किया गया है।

तीनों मामलों में ₹13.35 लाख के कथित अनुचित लाभ का प्रारंभिक अनुमान

इन तीन मामलों को मिलाकर जांच में करीब ₹13.35 लाख के कथित अनुचित लाभ का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। इसी आधार पर सरकारी खरीद व्यवस्था को हुए संभावित नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पंजीयन का दायरा इन तीन मामलों तक सीमित था या इससे अधिक किसानों और जमीनों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया।

प्राथमिकी दर्ज, रिकॉर्ड की जांच जारी

मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने भोपाल में प्राथमिकी दर्ज कर तीन आरोपियों समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया है। जांच में जमीन के रिकॉर्ड, फर्जी पंजीयन, बैंक खातों, मूंग की खरीद, मंडी से हुई खरीद और सरकारी खरीद केंद्रों से हुए भुगतान की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

मामले ने किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए बनाई गई एमएसपी खरीद व्यवस्था में पंजीयन और भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि फर्जी पंजीयन किस स्तर पर कराए गए, इसमें कितने लोग शामिल थे और सरकारी खरीद के जरिए कुल कितनी रकम का कथित अनुचित लाभ उठाया गया।

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