1998 में हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या और 1999 में पुलिस हिरासत से फरार होने का आरोप; नई पहचान बनाकर क्लीनिक चलाता रहा, संपत्ति कारोबार और ठेकेदारी में भी था सक्रिय

27 साल तक फर्जी डॉक्टर बनकर छिपा रहा हत्या का आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने मध्य प्रदेश से दबोचा

Roopa
By Roopa
5 Min Read

नई दिल्ली: लगभग 27 वर्षों तक फरार रहने के बाद हरियाणा में पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में वांछित एक आरोपी को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मध्य प्रदेश के अशोकनगर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी 1999 में पुलिस हिरासत से फरार होने के बाद अपनी पहचान बदलकर “डॉ. झटका” के नाम से एक क्लीनिक चला रहा था। इस दौरान वह कथित तौर पर बिना किसी वैध चिकित्सीय पंजीकरण के लोगों का इलाज करता रहा। इसके अलावा उसने संपत्ति कारोबार और ठेकेदारी का काम भी शुरू कर दिया था। दिल्ली पुलिस का कहना है कि लंबे समय तक पहचान छिपाकर रहने वाले आरोपी को तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान 53 वर्षीय राजिंदर बैरागी उर्फ राजिंदर सिंह यादव उर्फ “डॉ. झटका” के रूप में हुई है। वह वर्ष 1998 में हरियाणा के सोनीपत जिले में हुई एक हत्या के मामले में आरोपी था और अगले वर्ष पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। मंगलवार को उसे मध्य प्रदेश के अशोकनगर से गिरफ्तार किया गया और बुधवार को दिल्ली लाया गया।

जांच के अनुसार, आरोपी के खिलाफ मामला 10 मई 1998 को सोनीपत के सैयां खेड़ा गांव में आयोजित एक विवाह समारोह के दौरान हुई फायरिंग से जुड़ा है। पुलिस का आरोप है कि विवाह समारोह में दुल्हन पक्ष के लोगों से विवाद होने के बाद राजिंदर अपने पांच हथियारबंद साथियों के साथ वहां पहुंचा और अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस घटना में दुल्हन के चाचा तथा हरियाणा पुलिस के एक अधिकारी जय भगवान की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मामले में राजिंदर को गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, पुलिस के अनुसार 14 फरवरी 1999 को जब उत्तर प्रदेश पुलिस उसे गाजियाबाद जेल से सोनीपत अदालत में पेशी के लिए लेकर जा रही थी, तब वह हथकड़ी लगे होने के बावजूद पुलिस हिरासत से फरार हो गया। इसके बाद वह लगातार कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा और विभिन्न राज्यों में अपनी पहचान बदलकर रहने लगा।

जांच में सामने आया कि फरारी के बाद आरोपी सबसे पहले महाराष्ट्र के कोलाबा क्षेत्र पहुंचा, जहां उसने लगभग एक वर्ष तक एक स्कूल में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में काम किया। इसके बाद वह मध्य प्रदेश के अशोकनगर चला गया और राजेंद्र सिंह यादव के नाम से नई पहचान बनाकर रहने लगा। वर्ष 2003 में उसने एक महिला से विवाह किया, जो वर्तमान में मुंगावली के एक सरकारी अस्पताल में सहायक नर्स दाई (एएनएम) के रूप में कार्यरत है। दंपति के दो बच्चे हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने अशोकनगर में बिना किसी वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन के एक क्लीनिक शुरू किया, जिसके कारण स्थानीय लोग उसे “डॉ. झटका” के नाम से पहचानने लगे। इसके साथ ही वह संपत्ति की खरीद-फरोख्त और ठेकेदारी का काम भी करता था। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पहले कबड्डी खिलाड़ी था और इसी दौरान उसकी आपराधिक तत्वों से पहचान हुई, जिसके बाद वह अपराध की दुनिया में शामिल हो गया।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले की सुनवाई दोबारा शुरू किए जाने के बाद आरोपी की तलाश तेज की गई। जांच के दौरान पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि की, उसकी गतिविधियों और दैनिक दिनचर्या पर निगरानी रखी तथा तकनीकी विश्लेषण और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसके सटीक ठिकाने का पता लगाया। इसके बाद मध्य प्रदेश में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी ने बिना वैध चिकित्सीय अनुमति के कितने समय तक क्लीनिक संचालित किया और क्या इस अवधि में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भी उसकी संलिप्तता रही। साथ ही उसके दस्तावेजों, पहचान बदलने की प्रक्रिया और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और आरोपी को मूल हत्या तथा फरारी से जुड़े मामलों में अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article