नई दिल्ली। उत्पाद एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) के पूर्व अधिकारी रविंदर सिंह सांगवान की सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद गठित कंपनियों और कमला पसंद समूह से जुड़े कारोबार में करोड़ों रुपये के लेन-देन को लेकर एक जांच रिपोर्ट में कई सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सांगवान 30 अप्रैल 2022 को डीजीजीआई से सेवानिवृत्त हुए और इसके बाद महज 18 दिनों के भीतर उनसे जुड़ी तीन सीमित देयता भागीदारी फर्म (एलएलपी) अस्तित्व में आ गईं। इनमें से एक एलएलपी के माध्यम से चार वित्त वर्षों में कमला पसंद समूह से जुड़ी नौ कंपनियों के साथ ₹278.29 करोड़ का लेन-देन होने का दावा किया गया है।
उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस एफएमसीजी गुड्स एलएलपी का गठन 6 मई 2022, इंडस प्रॉम्प्ट लीगल्स एलएलपी का 19 मई 2022 और रामो होम्स एलएलपी का 23 मई 2022 को हुआ। यानी सांगवान की सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद तीनों एलएलपी गठित की गईं।
रिपोर्ट के अनुसार इंडस एफएमसीजी गुड्स एलएलपी ने वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच कमला पसंद समूह से जुड़े कारोबार में कुल ₹278.29 करोड़ का लेन-देन किया। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 में ₹45.66 करोड़, 2023-24 में ₹83.20 करोड़, 2024-25 में ₹75.66 करोड़ और 2025-26 में ₹73.78 करोड़ की रकम बताई गई है।
जांच में दावा किया गया है कि इंडस एफएमसीजी गुड्स एलएलपी ने कमला कांत एंड कंपनी एलएलपी से ब्रांड लाइसेंसिंग सेवाएं खरीदीं और उन्हें कमला पसंद समूह से जुड़ी नौ कंपनियों को उपलब्ध कराया। दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस एफएमसीजी गुड्स ने कमला कांत एंड कंपनी को ₹251.79 करोड़ का भुगतान किया, जबकि दोनों स्तरों के लेन-देन के बीच ₹26.50 करोड़ का अंतर रहा। रिपोर्ट ने इस अंतर को लगभग 9.52 प्रतिशत बताते हुए सवाल उठाया है कि यह सामान्य कारोबारी मार्जिन था या किसी पूर्व निर्धारित शुल्क या कमीशन की तरह काम कर रहा था। हालांकि, इन लेन-देन की वैधता और कारोबारी प्रकृति पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारियों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
दूसरी एलएलपी से भी ₹22.30 करोड़ की पेशेवर फीस
रिपोर्ट में कहा गया है कि सांगवान से जुड़ी दूसरी सक्रिय एलएलपी, इंडस प्रॉम्प्ट लीगल्स, को 2022-23 से 2025-26 के बीच आठ कॉरपोरेट संस्थाओं से ₹22.30 करोड़ की पेशेवर फीस मिली। दोनों एलएलपी का इस अवधि में संयुक्त कारोबार ₹313.94 करोड़ बताया गया है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
संपत्तियों के आंकड़ों पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट में सांगवान परिवार की अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि 2019 से 2026 के बीच परिवार के चार सदस्यों ने दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र में कुल ₹50.87 करोड़ मूल्य की 17 संपत्तियां खरीदीं। इनमें ₹5.25 करोड़ की संपत्तियां उस अवधि में खरीदे जाने का दावा किया गया है, जब सांगवान डीजीजीआई में कार्यरत थे। शेष ₹45.62 करोड़ की संपत्तियां सेवानिवृत्ति के बाद के चार वर्षों में खरीदे जाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में परिवार की घोषित आय ₹37.60 करोड़ बताई गई है। इसमें ₹8.22 करोड़ की कर योग्य आय और साझेदारी फर्मों से प्राप्त ₹29.38 करोड़ का कर-मुक्त लाभांश शामिल बताया गया है। सांगवान के बेटे शांतनु सिंह की करीब ₹21.61 करोड़ की संपत्तियों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21 में उनकी कर योग्य आय करीब ₹4,000 थी। संपत्तियों और अलग-अलग वर्षों की आय के बीच संबंध को भी जांच का विषय बनाया गया है।
सरकारी सेवा के दौरान संपत्ति संबंधी नियमों पर सवाल
रिपोर्ट में केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 18(1)(ii) का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारियों पर अचल संपत्ति से संबंधित निर्धारित जानकारी देने की जिम्मेदारी का उल्लेख किया गया है। दावा है कि सेवा अवधि में खरीदी गई ₹5.25 करोड़ की संपत्तियों के संबंध में अपेक्षित खुलासे नहीं किए गए। इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और सांगवान का पक्ष जरूरी होगा।
किराये की व्यवस्था भी जांच के दायरे में
रिपोर्ट के मुताबिक सांगवान और उनकी पत्नी ने दक्षिण दिल्ली स्थित अपनी संपत्ति इंडस प्रॉम्प्ट लीगल्स एलएलपी को ₹6 लाख प्रतिमाह किराये पर दी। 14 जनवरी 2025 के किरायानामे में दोनों मकान मालिक के रूप में और सांगवान एलएलपी के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में हस्ताक्षरकर्ता बताए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलएलपी ने 2024-25 और 2025-26 में दोनों को कुल ₹91.20 लाख किराया दिया।
इसके अलावा एचएम बिल्डटेक, इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक एंड मार्केट रिसर्च और एटर्ना वेल्थ से जुड़ी गतिविधियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एटर्ना वेल्थ की स्थापना 18 दिसंबर 2024 को हुई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों में प्रतिभूति बाजार, म्यूचुअल फंड, बीमा या बैंकिंग नियामकों से संबंधित आवश्यक पंजीकरण का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस दावे की स्वतंत्र नियामकीय पुष्टि जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार प्रकाशन से पहले सांगवान परिवार, मोहित छाबड़ा और संबंधित कंपनियों को सवाल भेजकर उनका पक्ष मांगा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में सामने आए आरोपों और वित्तीय लेन-देन की वास्तविक प्रकृति का अंतिम निर्धारण संबंधित पक्षों के जवाब, मूल दस्तावेजों और सक्षम जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगा।
