ईओडब्ल्यू लखनऊ की कार्रवाई; निवेशकों को कम समय में रकम दोगुनी करने का कथित लालच देकर जुटाया गया था पैसा, कंपनी बंद होने के बाद आरोपी फरार हो गए थे

₹78 करोड़ की चिटफंड धोखाधड़ी में 10 साल से फरार तीन आरोपी गिरफ्तार, मुरादाबाद और रामपुर से दबोचे गए

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By Roopa
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मुरादाबाद। ₹78 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में करीब 10 साल से फरार चल रहे तीन आरोपियों को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) लखनऊ की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि चिटफंड कंपनी के निदेशकों और एजेंटों ने कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच देकर लोगों से करोड़ों रुपये जमा कराए और बाद में रकम का कथित तौर पर गबन कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में दो मुरादाबाद और एक रामपुर का रहने वाला है।

तीनों आरोपी कथित तौर पर ग्रीन रे इंटरनेशनल कंपनी से जुड़े थे। कंपनी की विभिन्न निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से रकम जुटाए जाने का आरोप है। मामले में गलशहीद थाने में वर्ष 2016 में केस दर्ज किया गया था। बाद में शासन के निर्देश पर इसकी जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गई थी।

पुलिस के मुताबिक, ईओडब्ल्यू लखनऊ की टीम ने मुगलपुरा थाना क्षेत्र के वरबलान गली नंबर-5 स्थित जामा मस्जिद पार्क के पास रहने वाले फुरकान अहमद को कटघर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। दूसरा आरोपी फिरासत अली, मूढ़ापांडे क्षेत्र के करनपुर चौकी अंतर्गत मातीपुर उर्फ मैनी गांव का निवासी है। उसे मूढ़ापांडे थाना क्षेत्र से पकड़ा गया।

तीसरे आरोपी इब्राहिम सैफी को भोजपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। वह रामपुर के टांडा थाना क्षेत्र के नवाबपुरा मोहल्ले का रहने वाला है। तीनों आरोपी गलशहीद थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 64/16 में वांछित चल रहे थे।

जांच में सामने आए तीनों आरोपियों के नाम

ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान फुरकान अहमद, फिरासत अली और इब्राहिम सैफी के नाम सामने आए थे। जांच टीम ने उनकी तलाश शुरू की और गुरुवार को तीनों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब आरोपियों से कंपनी की गतिविधियों, निवेशकों से जुटाई गई रकम और उसके कथित इस्तेमाल से संबंधित जानकारी जुटा रही है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा

ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार, ग्रीन रे इंटरनेशनल के निदेशक और एजेंट लोगों को कंपनी की अलग-अलग योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित करते थे। उन्हें कथित तौर पर भरोसा दिलाया जाता था कि कम समय में उनकी जमा रकम दोगुनी हो जाएगी।

लोगों का भरोसा जीतने के लिए कुछ ग्राहकों को समय-समय पर रकम वापस किए जाने का भी आरोप है। इससे निवेशकों को कंपनी की योजनाओं पर विश्वास हुआ और उन्होंने बाद में अधिक रकम निवेश की। इसी तरीके से कंपनी से जुड़े लोगों ने बड़े पैमाने पर धनराशि जुटाई।

बेरोजगार युवकों को भी नेटवर्क से जोड़ा

जांच में यह भी सामने आया कि कई बेरोजगार युवक कंपनी से जुड़ गए थे। आरोप है कि इन युवकों के माध्यम से आम लोगों से निवेश के नाम पर बड़ी रकम जमा कराई गई। कंपनी का नेटवर्क बढ़ने के साथ निवेशकों से जुटाई गई राशि भी बढ़ती गई।

बाद में निवेशकों से जमा करीब ₹78 करोड़ की रकम कथित तौर पर हड़पकर आपस में बांटने का आरोप है। इसके बाद कंपनी बंद कर दी गई और उससे जुड़े आरोपी तथा अन्य लोग फरार हो गए। ईओडब्ल्यू अब यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में गई और उसे किस तरह निकाला या स्थानांतरित किया गया।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी मामले

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि ग्रीन रे इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ कंपनीज के खिलाफ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के अलग-अलग जिलों के विभिन्न थानों में मामले दर्ज हैं। इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है।

अब मुरादाबाद में हुई गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसी कंपनी के व्यापक नेटवर्क और आरोपियों की अन्य राज्यों में मौजूद कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या एक ही निवेश योजना के जरिए अलग-अलग राज्यों में लोगों से रकम जुटाई गई थी और गिरफ्तार आरोपी कंपनी के अन्य पदाधिकारियों या एजेंटों के संपर्क में थे।

ईओडब्ल्यू आरोपियों से कंपनी के संचालन, निवेशकों से जुटाई गई रकम और ₹78 करोड़ की कथित धनराशि के बंटवारे के संबंध में पूछताछ करेगी। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

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