हैदराबाद। चिक्कड़पल्ली में ज्वेलरी शोरूम चलाने वाली महिला, उसके पति और पिता के खिलाफ तीन स्थानीय ज्वेलर्स से करीब ₹9 करोड़ के सोने के आभूषण लेकर कथित तौर पर भुगतान नहीं करने का मामला दर्ज किया गया है। सेंट्रल क्राइम स्टेशन (सीसीएस) पुलिस ने अबिद्स क्षेत्र के एक कारोबारी की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
शिकायतकर्ता अविनाश कुमार अग्रवाल ने 24 सितंबर को पुलिस से संपर्क कर आरोप लगाया कि शोरूम संचालक के पास उनके करीब ₹4.5 करोड़ बकाया हैं। अग्रवाल के मुताबिक वह इसी साल फरवरी से चिक्कड़पल्ली स्थित शोरूम की संचालक के. श्रीजा को सोने के आभूषण की आपूर्ति कर रहे थे। शुरुआत में श्रीजा और उनके पति नवीन ने समय पर भुगतान किया, लेकिन अगस्त तक करीब 1,800 ग्राम सोने के आभूषण का भुगतान लंबित हो गया।
शिकायत के अनुसार, अगस्त के अंतिम सप्ताह में श्रीजा ने विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाली एक प्रदर्शनी के लिए बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण की मांग की। इससे पहले उन्होंने 800 ग्राम आभूषण का भुगतान किया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर 2,252 ग्राम अतिरिक्त सोने के आभूषण सौंपे, जिनकी कीमत करीब ₹3.5 करोड़ बताई गई। इस आपूर्ति के बाद श्रीजा पर कुल बकाया राशि बढ़कर करीब ₹4.5 करोड़ हो गई।
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अग्रवाल का आरोप है कि नवीन ने बैंक से ऋण मंजूर होने के बाद बकाया रकम चुकाने का आश्वासन दिया था। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी कथित तौर पर कोई भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसे भुगतान का भरोसा देकर लगातार आभूषणों की आपूर्ति कराई जाती रही।
मामले में केवल एक कारोबारी के साथ लेन-देन ही जांच के दायरे में नहीं है। शिकायत के मुताबिक, श्रीजा और उनके परिवार ने इसी तरह शहर के दो अन्य ज्वेलर्स से भी आभूषण लिए। एक कारोबारी से करीब ₹3.44 करोड़ और दूसरे से करीब ₹1.2 करोड़ मूल्य के आभूषण लेने के बाद भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया गया है। इन तीनों कथित लेन-देन को मिलाकर शिकायत में करीब ₹9 करोड़ की देनदारी का उल्लेख किया गया है।
पुलिस ने मामले में श्रीजा, उनके पति नवीन और पिता के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी, धारा 316(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात, धारा 351(2) के तहत आपराधिक धमकी और धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया है। धारा 3(5) के तहत साझा मंशा से किए गए कृत्य को भी मामले में शामिल किया गया है।
प्रारंभिक शिकायत के आधार पर पुलिस अब कथित लेन-देन और भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि अलग-अलग ज्वेलर्स से किस अवधि में कितना सोना लिया गया, उसके बदले कितनी रकम का भुगतान हुआ और कितना बकाया रहा। बैंक खातों और कारोबारी रिकॉर्ड के जरिये भुगतान के दावों की भी जांच की जा सकती है।
पुलिस के सामने यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि कथित तौर पर बड़ी मात्रा में आभूषण लेने के लिए किन कारोबारी आश्वासनों या दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। विशाखापत्तनम की प्रदर्शनी के लिए आभूषण मंगाए जाने के दावे और उसके बाद भुगतान नहीं होने की परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया जाएगा।
ज्वेलरी कारोबार में बड़ी रकम और सोने की आपूर्ति से जुड़े ऐसे विवादों में खरीद-बिक्री के बिल, वजन संबंधी रिकॉर्ड, भुगतान की प्रविष्टियां, बैंक लेन-देन और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत अहम साक्ष्य बन सकते हैं। पुलिस इन दस्तावेजों के आधार पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने का प्रयास करेगी।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और आरोपों की जांच जारी है। श्रीजा, उनके पति और पिता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। तीनों ज्वेलर्स से जुड़े कथित लेन-देन और करीब ₹9 करोड़ की कुल रकम के दावे की भी जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
