अहमदाबाद। घर बैठे काम और कमीशन कमाने का झांसा देकर एक 23 वर्षीय महिला और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड और ईएमआई योजनाओं के जरिए सामान खरीदवाकर ₹12.27 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो लोगों ने शुरुआत में कमीशन और ऋण की किस्तें समय पर चुकाकर परिवार का भरोसा जीता और बाद में भुगतान बंद कर दिया। इसके बाद परिवार पर लाखों रुपये की देनदारी आ गई। अहमदाबाद साइबर अपराध पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता दीया शैलेशभाई पटेल बापूनगर स्थित एक बैंक में प्रशिक्षु के तौर पर काम करती हैं। शिकायत के मुताबिक उन्होंने नौकरी के लिए एक रोजगार पोर्टल पर अपना बायोडाटा अपलोड किया था। इसके बाद जय नाम बताने वाले एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और दावा किया कि उसे पोर्टल से उनका विवरण मिला है। उसने बिना किसी शुरुआती निवेश के घर से काम करने और कमीशन कमाने का प्रस्ताव दिया।
आरोप है कि इसके बाद व्हाट्सऐप पर उन्हें ईएमआई कार्ड, व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड और उपयोगिता बिलों के भुगतान से जुड़े काम के बदले कमीशन के संदेश भेजे गए। बाद में वह व्यक्ति उनके घर पहुंचा और अपनी पहचान अशोक वीरमगामा के रूप में बताई। उसने कहा कि उसका वास्तविक नाम अशोक है, जबकि वह आमतौर पर जय नाम से जाना जाता है।
शिकायत के अनुसार अशोक ने खुद को सर्वोदय सहकारी मंडली से जुड़ा बताया और दावा किया कि संस्था को इलेक्ट्रॉनिक सामान की जरूरत है। उसने परिवार के सदस्यों के नाम पर व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड और वित्तीय योजनाओं से सामान खरीदवाने के बदले 10 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देने का कथित प्रस्ताव रखा। साथ ही भरोसा दिलाया कि इन खरीद पर बनने वाली ईएमआई वह या संबंधित संस्था चुकाएगी।
आरोप है कि शुरुआत में अशोक ने दीया के पिता शैलेशभाई के नाम पर वित्तीय योजना से एक इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदवाया। उसने सामान अपने पास ले लिया और उसकी किस्तें चुकाने के साथ कमीशन की रकम भी दी। बाद में उसने राजन मेहता नाम के व्यक्ति को अपना सहयोगी बताते हुए परिवार से परिचय कराया। इसके बाद राजन भी इस व्यवस्था में शामिल हो गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
शिकायत में कहा गया है कि अगले कुछ महीनों में परिवार के सदस्यों ने कई मोबाइल फोन, एयर कंडीशनर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान व्यक्तिगत ऋण, क्रेडिट कार्ड तथा ईएमआई योजनाओं के जरिए खरीदे। आरोप है कि खरीदा गया सामान या ऋण से मिली रकम अशोक और राजन को सौंप दी जाती थी। शुरुआत में दोनों कथित तौर पर कमीशन और ईएमआई का भुगतान करते रहे, जिससे परिवार का विश्वास और मजबूत हुआ।
दीया ने आरोप लगाया कि अशोक ने उन्हें सावधि जमा बनवाने और उसके आधार पर क्रेडिट कार्ड लेने के लिए भी राजी किया। बाद में उसने कथित तौर पर कार्ड और उनके पिन तक हासिल कर लिए और उनकी अनुमति के बिना लेन-देन किया। शिकायत में डिजिटल भुगतान माध्यमों से अशोक को रकम भेजे जाने तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर अतिरिक्त ऋण और ईएमआई खरीद कराने का भी उल्लेख है।
परिवार के मुताबिक मई-जून 2026 के आसपास आरोपियों ने ईएमआई का भुगतान बंद कर दिया। इसके बाद मोबाइल फोन, एयर कंडीशनर और अन्य सामान से जुड़े ऋणों की देनदारी बढ़ती गई। एक मामले में करीब ₹1.30 लाख कीमत का सैमसंग एस25 अल्ट्रा फोन व्यक्तिगत क्रेडिट सुविधा से खरीदा गया था, जिस पर करीब ₹1 लाख बकाया रहने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने कुल वित्तीय देनदारी ₹12.27 लाख बताई है। इसमें ₹5.76 लाख दो सावधि जमा आधारित क्रेडिट कार्ड से जुड़े लेन-देन और करीब ₹5.86 लाख ऋण, अग्रिम, ईएमआई खरीद तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर लिए गए सामान से संबंधित बताए गए हैं।
किस्तों के भुगतान को लेकर परिवार को नोटिस मिलने के बाद अशोक ने कथित तौर पर संस्था से भुगतान लंबित होने और उससे देनदारी चुकाने का भरोसा दिया। जून 2026 में उसने ₹4 लाख का सुरक्षा चेक भी कथित तौर पर दिया और अगले महीने जमा करने को कहा। हालांकि बाद में अशोक और राजन ने फोन और संदेशों का जवाब देना बंद कर दिया।
दीया ने पुलिस को यह भी बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि दोनों आरोपी गुजरात में अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की कार्यप्रणाली अपना रहे थे। शिकायत में आरोप है कि पहले कमीशन और ईएमआई का भुगतान कर भरोसा बनाया जाता था और बाद में बड़े ऋण या महंगे सामान की खरीद कराने के बाद भुगतान रोक दिया जाता था।
अहमदाबाद अपराध शाखा की साइबर अपराध इकाई ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस व्हाट्सऐप बातचीत, तस्वीरों, ऋण संबंधी दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी की जांच कर रही है। साथ ही डिजिटल भुगतान और बैंक खातों के माध्यम से रकम के प्रवाह तथा अशोक और राजन की अन्य समान मामलों में संभावित भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
