पंचकूला। सरकारी विभागों के बैंक खातों से ₹160.85 करोड़ की कथित धोखाधड़ी कर निकासी के मामले में सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बैंकिंग प्रक्रिया और सरकारी धन की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच एजेंसी ने मामले में छह आईएएस अधिकारियों समेत बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया है। चार्जशीट के मुताबिक, दो बैंकों में सरकारी विभागों के नाम से जुड़े खातों को लेकर करीब 30 कथित फर्जी डेबिट लेन-देन किए गए, जबकि कुछ संबंधित शाखाओं में ऐसे सरकारी खाते मौजूद ही नहीं थे।
चार्जशीट में मोहम्मद शाईन, साकेत कुमार, आरके सिंह, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और पंकज अग्रवाल समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि फर्जी चेक, कथित जाली हस्ताक्षर, डेबिट नोट और गलत बैंकिंग रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर सरकारी धन को अलग-अलग खातों में भेजा गया। जांच के दौरान इन लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्य भी मिलने की बात कही गई है।
मामले में सबसे चौंकाने वाले आरोपों में कैंसिल किए जा चुके चेक का इस्तेमाल कर करीब ₹10 करोड़ निकालना भी शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार, बैंकिंग प्रक्रिया में किसी बड़े भुगतान से पहले चेक की वैधता, हस्ताक्षर, सुरक्षा विशेषताओं और अन्य निर्धारित मानकों की जांच की जानी थी। चार्जशीट में आरोप है कि इन प्रक्रियाओं के बावजूद कथित फर्जी लेन-देन को अंजाम दिया गया।
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चार्जशीट में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक चरनजीत सिंह रंधावा को भी आरोपी बनाया गया है। उन्हें 37वें आरोपी के तौर पर नामजद किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, निदेशक पंचायत एमएमजीएवाई 2.0 के खाते से कथित तौर पर 14 फर्जी डेबिट लेन-देन किए गए। इनमें जाली चेक और डेबिट नोट के इस्तेमाल का आरोप है।
जांच के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2025 को ₹8 करोड़, 4 नवंबर को ₹25 करोड़ और 15 नवंबर को ₹2.25 करोड़ कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर किए गए। एजेंसी ने इन लेन-देन को सरकारी खातों से रकम निकालने के कथित नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल किया है। हालांकि, पूरे धन प्रवाह और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
जांच एजेंसी के अनुसार, एयू बैंक के एक खाते से निकाली गई रकम का एक हिस्सा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स समेत दूसरे खातों में पहुंचा। चार्जशीट में 15 जनवरी 2026 को करीब ₹25.33 करोड़ स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से आगे किसी अन्य खाते में ट्रांसफर किए जाने का भी उल्लेख है। इससे जांच एजेंसी ने रकम को कई खातों के माध्यम से आगे बढ़ाए जाने की आशंका जताई है।
मामले में ₹18.46 करोड़ की कथित फर्जी सावधि जमा का मामला भी सामने आया है। चार्जशीट के अनुसार, एक सरकारी विभाग को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में बनाई गई 11 एफडी के विवरण से संबंधित दस्तावेज भेजे गए थे, जबकि जांच में ऐसी एफडी के वास्तव में बनाए जाने की पुष्टि नहीं हुई। 23 जनवरी 2026 के एक पत्र के जरिये कथित तौर पर इन एफडी का विवरण विभाग को भेजा गया था।
सीबीआई का आरोप है कि बैंक के एक कर्मचारी ने तत्कालीन बैंक अधिकारियों के निर्देश पर यह पत्र ई-मेल के जरिए संबंधित विभाग को भेजा। जांच में बैंक अधिकारियों के बीच हुई व्हाट्सऐप बातचीत और ई-मेल को भी महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बताया गया है। एजेंसी इन संचार माध्यमों के जरिए कथित लेन-देन और दस्तावेजी प्रक्रिया के बीच संबंध की जांच कर रही है।
चार्जशीट में सामने आए विवरण से यह भी संकेत मिलता है कि जांच केवल रकम की निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी खातों की निगरानी, बैंकिंग सत्यापन और दस्तावेजों की प्रामाणिकता से जुड़े पूरे तंत्र की पड़ताल की जा रही है। कथित फर्जी चेक, भुगतान रिकॉर्ड, खातों के बीच रकम के हस्तांतरण और डिजिटल संवाद को जोड़कर जांच एजेंसी ने मामले की कड़ियां तलाशने का प्रयास किया है।
अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि सरकारी धन की कथित निकासी में किस स्तर पर चूक या मिलीभगत हुई और रकम अंततः किन-किन खातों तक पहुंची। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अदालत में सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की जांच होगी और आरोपियों का पक्ष भी सामने आएगा।
