बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा में कथित घोटाले के मामले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को अदालत से राहत नहीं मिली। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने शुक्रवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रथमदृष्टया मनी ट्रेल और घोटाले में कथित रूप से शामिल लोगों के साथ उनके संपर्क को जमानत नहीं देने का प्रमुख आधार माना। गंगवार को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। वह उस समय कर्नाटक लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर थे।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी की ओर से पेश दस्तावेजों में गंगवार और कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले के बीच संपर्क के संकेत मिलते हैं। अदालत के अनुसार, दोनों के बीच संपर्क के साथ अभ्यर्थियों से जुड़े धन के लेन-देन की कड़ियां भी प्रथमदृष्टया सामने आती हैं। जांच में कन्नाले पर अभ्यर्थियों से कथित तौर पर रिश्वत की रकम जुटाने वाले बिचौलिए के रूप में भूमिका निभाने का आरोप है।
मामले की जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जनवरी में हुई पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र परीक्षा से एक दिन पहले कथित तौर पर लीक किए गए थे। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक ने प्रश्न कथित रूप से बिचौलिए तक पहुंचाए थे। बताया गया है कि 8 और 9 जनवरी को हुई परीक्षा के प्रश्न एक पेन ड्राइव के जरिए कन्नाले तक पहुंचाए गए। अदालत ने गंगवार से संबंधित एक श्याओमी टैबलेट को कथित रूप से नष्ट किए जाने की बात को भी जमानत खारिज करने के कारणों में शामिल किया।
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गंगवार फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। कर्नाटक पुलिस की हिरासत 9 सितंबर को समाप्त होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद मामले के धनशोधन से जुड़े पहलू की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है।
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि कथित बिचौलिए ने परीक्षा में बेहतर रैंक हासिल करने वाले 20 अभ्यर्थियों से करीब 20 लाख से 40 लाख रुपये तक की रिश्वत वसूली। जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर मिली रकम से गंगवार की महिला मित्र के लिए करीब 52 लाख रुपये के आभूषण खरीदे गए। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश में गंगवार की निशानदेही पर आभूषण बरामद किए जाने का दावा भी किया गया है।
अदालत में जांच एजेंसी ने कन्नाले से जुड़े बैंक खातों के रिकॉर्ड भी पेश किए। इन खातों के जरिए अभ्यर्थियों से प्राप्त रकम के आगे भेजे जाने की बात जांच में सामने आई। इसके अलावा बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट क्षेत्र के पास एक आभूषण शोरूम की सीसीटीवी फुटेज भी पेश की गई, जिसमें गंगवार और एक महिला के अलग-अलग मौकों पर सोने और हीरे के आभूषण खरीदने की बात कही गई है। इन रिकॉर्ड और लेन-देन को जांच में कथित धन के प्रवाह से जोड़कर देखा जा रहा है।
परीक्षा में अनियमितताओं का मामला एक असफल अभ्यर्थी की शिकायत के बाद सामने आया। 24 जुलाई को दर्ज शिकायत में दावा किया गया कि परीक्षा में शामिल करीब 1,400 अभ्यर्थियों में से 29 ऐसे उम्मीदवार थे, जिनका शैक्षणिक रिकॉर्ड कमजोर था, लेकिन उन्होंने 600 में 450 से अधिक अंक हासिल किए। कुल 329 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। कथित घोटाले के आरोप सामने आने के बाद 17 जुलाई को घोषित परिणामों को KPSC ने रोक दिया और राज्य सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी।
इसी बीच KPSC से जुड़े एक अन्य भर्ती मामले में विशेष अदालत ने एक चयनित अभ्यर्थी की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज की है। आरोप है कि कर्नाटक प्रशासनिक सेवा के राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में चयन के लिए अभ्यर्थी ने साक्षात्कार पैनल में शामिल KPSC सदस्य को प्रभावित करने का प्रयास किया।
इस मामले में KPSC सदस्य शांता होसामणि की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। अदालत के सामने पेश कॉल डिटेल रिकॉर्ड के मुताबिक, अभ्यर्थी ने 8 अप्रैल से 2 मई 2026 के बीच KPSC सदस्य से 13 बार फोन पर संपर्क किया था, जबकि उसका साक्षात्कार 8 मई को निर्धारित था। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में कथित अनुचित तरीके अपनाने और साक्षात्कार में बेहतर अंक हासिल करने के लिए सदस्य को प्रभावित करने का प्रयास गंभीर आरोप है।
राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे और 384 पदों के लिए चयन हुआ। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को इन पदों की अंतिम चयन सूची घोषित किए जाने पर रोक लगा दी थी। दोनों मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है तथा आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।
